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नक्सलियों को बर्दाश्त नहीं बाहरी हमला

या यह माना जाये कि सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ दिन-रात चूहे-बिल्ली का खेल खेलने वाले नक्सली भी देश पर बाहरी ताकतों के हमले को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं? किसी नतीजे पर तुरंत पहुंचना गलत होगा लेकिन राज्य क एक नक्सली संगठन न मुंबई हमलों क दौरान जीवन शहीद होनेवाल सुरक्षाकर्मियों को जसी श्रद्धांजलि दी और उसका प्रचार किया है, उससे लगता है कि नक्सलियों की एक धारा में देशभक्ित की भावना भी जोर मार रही है। शायद इसका कारण उनका चीन से मोहभंग होना भी हो जिसने अपनी नीति में काफी बदलाव कर लिया।ड्ढr प्रतिबंधित संगठन कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया (माओवादी) स अलग हुए संगठन जनमुक्ित संघर्ष मोर्चा (ाएसएम) न यहां मीडियाकर्मियों को एक सीडी भेजी है जिसमें दिखाया गया है कि मार गए सुरक्षाकर्मियों क सम्मान में नक्सलियों न दो मिनट का मौन रखा और अपनी राइफलों से हवाई फायर दाग कर उन्हं सलामी दी। यह सब सोमवार को लातेहार जिले के एक जंगल में हुआ। श्रद्धांजलि सभा में करीब 200 नक्सली और उनके समर्थक शामिल थे।ड्ढr इस मौके पर संगठन के कमांडर ने देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले सुरक्षाकर्मियों के प्रति कृतज्ञता का इजहार किया लेकिन झारखंड में सुरक्षा बलों के साथ अपनी लड़ाई जारी रखने की बात भी कही। जनमुक्ित संघर्ष मोर्चा एमसीसीआई की तरह हार्डलाइनर नहीं है। फिलहाल इसकी कमान उमेश माली के हाथों में है जो चतरा जिले का रहने वाला है। उमेश पहले एमसीसीआई में ही था लेकिन कुछ दिनों तक पुलिस हिरासत में रहने के बाद इसने अपना अलग संगठन बना लिया। इसी आधार पर यह आरोप भी लगता है कि यह पुलिस-प्रायोजित संगठन है।ड्ढr यह संगठन भी अन्य नक्सली संगठनों की तरह लेवी वसूल करता है लेकिन इसका मुख्य जोर उन अधिकारियों से निबटना है जिन्हें यह भ्रष्ट मानता है। इसके और एमसीसीआई के बीच वर्चस्व की लड़ाई भी होती रही है। हाल ही में हजारीबाग पुलिस ने जेएसएम के 16 सदस्यों को दबोच लिया था।

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