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नई भर्तियों के वेतनभत्ते ही दोगुना कर देंगे पुलिस का बचाट

यूपी पुलिस का मौाूदा बाट 3अरब के करीब है और अब करीब इतना ही अतिरिक्त खर्च सिपाही-दरोगा की नई भर्ती होने के बाद सिर्फ वेतनभत्तों पर करना होगा। नए वेतनमान के हिसाब से यह रकम सालाना 40 अरब के करीब पहुँच रही है। यह सही है कि आतंकवाद और कानून व्यवस्था के मद्देनार पुलिस भर्तीोरूरी है पर वित्त विभाग में बैठे अफसर इस गुणाभाग मेंोुटे हैं कि आखिर इतनी यादा राशिोुटाई कहाँ सेोाएगी। यह हाल तब हैोब नई फोर्स के लिए थाना, चौकी, आवास, वाहन और अन्य आधारभूत खर्चो का व्यय इसमें शामिल नहीं है।ड्ढr एडीाी कानून व्यवस्था बृालाल और गृह विभाग के विशेष सचिव आर.पी.मिश्र ने बताया कि यह भर्तियाँ एकसाथ नहीं कीोाएँगी। सृाित पदों पर चरणबद्ध तरीकों से भर्ती होगी। सूत्रों के मुताबिक अभी यूपी में करीब डेढ़ लाख पुलिसकर्मी हैं। इनमें एक लाख कांस्टेबिल, 35 हाार के करीब पीएसी, 404 आईपीएस, दो हाार के करीब पीपीएस और लगभग पाँच हाार इंस्पेक्टर व सब इंस्पेक्टर हैं। पुलिस के इस ढाँचे का कुल बाट 3अरब हैंोिसका करीब नब्बे फीसदी सिर्फ वेतनभत्तों पर खर्च होता है। अब नई भर्तियों के पहले चरण में बीस से तीस हाार के करीब सिपाहियों की भर्ती कीोा सकती है। प्रशिक्षण आदि का काम पुलिस व पीएसी के अच्छे ट्रेनिंग सेंटरों पर कियाोाएगा। हालाँकि इनकी भी काफी कमी है। अधिकारियों ने इन भर्तियों पर होने वाले खर्च कीोानकारी दे पाने में असमर्थताोाहिर की पर शासन के सूत्रों के मुताबिक भर्तियों की राह में सबसे बड़ी बाधा बाट ही है। एक अधिकारी के मुताबिक संशोधित वेतनमान लागू होने की दशा में राय के बाट पर पहले भी बड़ा भार है। डेढ़ लाख भर्ती होने की दशा में बाट की रूपरखा तय करना और भी कठिन होगा। गृह विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक पुलिस भर्ती करनाोरूरी है इसलिए बाट कहीं न कहीं से तो निकालना ही पड़ेगा। इसके लिए अन्य दूसर गैरोरूरी खर्चो में कटौती कीोा सकती है। ं

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