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बिखेरंगे आठ राज्यों की सांस्कृतिक खुशबू

पूर्वी भारत के आठ राज्यों की संस्कृति की इन्द्रधनुषी छटा बिहार में बिखरगी। सूबे के लोग पहली बार अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्िकम और त्रिपुरा की मिट्टी की खूशबू भी महसूस करंगे। साथ ही वहां की शानदार ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की सुगंध भी ले सकेंगे। केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय, बिहार के कला व संस्कृति विभाग और पूर्वी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के तत्वावधान में ‘आक्टेव’ की ओर से पटना के गांधी मैदान में पेश यह कार्यक्रम अनोखा और अद्भुत होगा।ड्ढr ड्ढr पूर्वी राज्यों को संस्कृति की डोर से बांधने के अभियान में उन राज्यों के 500 से अधिक कलाकार बिहार पहुंचे हैं। वे पूर उत्तर पूर्व भारत को ही बिहार की धरती पर उतारने का प्रयास करंगे। कला संस्कृति सचिव विवेक कुमार सिंह, पूर्वी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की निदेशक अनुराधा मुखर्जी और उत्तर पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की निदेशक वी. हेकाली झिमोमी ने बुधवार को संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में बताया कि 4 से 8 दिसम्बर तक चलने वाले इस कार्यक्रम में बिहार के लोग पूर्वी भारत की ‘उत्तरी पूर्वी समृद्ध संस्कृति की स्वर्णिम झलकियों’ से रूबरू भी होंगे। इस कार्यक्रम में जहां इन राज्यों के पारम्परिक व लोक नृत्यों को पेश किया जाएगा वहीं शास्त्रीय नृत्य, साहित्य, नाटक, चित्रकला और हस्तशिल्प समेत तमाम स्थानीय कलाएं भी प्रदर्शित होंगी। दिल्ली, गोवा, त्रिवेन्द्रम के बाद ‘आक्टेव’ की यात्रा पटना पहुंची है। बिहार के लोग अरुणाचल प्रदेश की अजि लहमू, असम की मिशिंग बिहू, बिहू, बारदोई, शिख्ला, शंख, मणिपुर की माइवी जागोई, ढोल चोलोम, पुंग चोलोम, मेघालय की होको नृत्य, का शद मस्तीए, मिजोरम की चेराव, नागालैंड की लिथो शीले फेटा, सउलिलि, सिक्िकम की सिंघी छम, चंडी नृत्य और त्रिपुरा की होजा गिरी, सत्रिया नृत्य व रासलीला को एक साथ देख सकेंगे। इसके अलावा उत्तर पूर्वी भारत का समवेत संगीत, केइबुल लामजाओ (बैले प्रस्तुति) के साथ-साथ मेघालय, मिजोरम और नागालैंड का रॉक बैंड का अद्भुत नजारा भी लोगों के सामने होगा।

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