अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

20000 से ज्यादा निकाह पढ़ा चुके हैं गुलाम मुस्तफा

गुलाम मुस्तफा एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्हें मुसलिम समुदाय में बड़ी आदर और सम्मान देती है। जीवन के अटूट बंधन में बांधने वाला एक मात्र शख्स। मुसलिम समाज में दुलहा-दूल्हन का निकाह पढ़ा कर एक बंधन में बांधते हैं। झारखंड के हर जिले से निकाह करवाने के लिए इनके पास निमंत्रण आता है। परन्तु अत्यधिक व्यस्तता के कारण हर जगह पहुंच तो नहीं पाते लेकिन निकाहनामें पर अपनी मुहर लगाते हैं। इनकी मुहर लगने के बाद एक तरह से सरकारी मान्यता मिल जाती है। उनकी मशरूफियत का अंदाजा महा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक उन्होंने बीस हाार से ज्यादा दुल्हा-दुल्हनों को एक बंधन में बांधा है। वह इस काम में 36 सालों से जुड़े हुए हैं। अविभाजित बिहार के छोटानागपुर इलाके में तीन थे और राज्य बनने के बाद महा एक ही रह गये। 78 वर्षीय काजी गुलाम मुसतफा बताते हैं कि उनकी शिक्षा-दीक्षा बनारस में ही हुई है। बनारस के मदरसा दारूल उलूम में उन्होंने दीनी तालिम ली। वहां उन्होंने 1में आलीम की उपाधि ली। इसके बाद वर्ष 1में रांची आ गये। राइन मसजिद में उन्होंने इमामत की। वर्तमान में भी वे उसी मसजिद में नमाज पढ़ाते हैं। इसके अलावा वे अंजुमन इसलामिया से भी कई वर्षो तक जुड़े रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि वे वर्ष 1में वे सरकार की ओर से शहर-ए-काजी के पद पर नियुक्त किये गये। उस समय से अब तक उन्होंने तकरीबन बीस हाार लोगों का निकाह पढ़ाया।ड्ढr मजेदार बात यह है कि जिस कमर में वे रहते हैं वहां उन्होंने करीब पांच हाार से अधिक लोगों की शादी करायी है। इन्हें सरकार की ओर कोई सुविधा प्राप्त नहीं हैं।ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: 20000 से ज्यादा निकाह पढ़ा चुके हैं गुलाम मुस्तफा