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कोर्ट में हाजिर नहीं हो सके काली मरांडी

रेलवे के गैंगमैन काली मरांडी को चार दिसंबर को हाइकोर्ट में सशरीर प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इस पर कोर्ट ने जामताड़ा के डीसी और एसपी को 15 दिसंबर को हर हाल में काली मरांडी को कोर्ट में सशरीर हाजिर करने का निर्देश दिया। यदि काली मरांडी को हाजिर नहीं किया जा सका, तो डीसी और एसपी को खुद कोर्ट में हाजिर होना होगा। जस्टिस एमवाइ इकबाल और जस्टिस डीकेसिन्हा की कोर्ट ने कालो सोरन की याचिका पर सुनवाई के बाद उक्त आदेश दिया। काली मरांडी को लेकर अलग-अलग दावे किये जा रहे हैं। काली मरांडी की पत्नी कालो सोरन का कहना है कि मरांडी की मृत्यु 1में हो गयी। उनका डेथ सर्टिफिकेट भी पंचायत सेवक ने जारी किया है। इसके बाद जिला प्रशासन ने उन्हें उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र भी दिया है, लेकिन रलवे का कहना है कि काली मरांडी जिंदा है। क्योंकि पंचायत सेवक ने जो डेथ सर्टिफिकेट दायर किया था, उसे उन्होंने रद्द कर दिया है। बाद में जांच के बाद पता चला कि मरांडी जिंदा है। रलवे के इस दावे के बाद मरांडी की पत्नी को मौत का मुआवजा और बकाये का भुगतान नहीं हो पा रहा है। यह मामला कैट से होता हुआ झारखंड हाइकोर्ट पहुंचा है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने रलवे को मरांडी की सर्विस बुक प्रस्तुत करने को कहा था। कोर्ट ने डीसी और एसपी के माध्यम से मरांडी को कोर्ट में प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया था।ड्ढr चार दिसंबर को रलवे की ओर से बताया गया कि डीसी और एसपी को कोर्ट के आदेश की जानकारी दे दी गयी है। इस पर कोर्ट ने 15 दिसंबर तक का समय देते हुए दोनों अधिकारियों को निर्देश दिया कि मरांडी को कोर्ट में हाजिर किया जाये। प्रार्थी की ओर से वकील रूपेश कुमार ने बहस की।

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