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..पर यह भंगिमा सृजन के लिए है

खिली बोगनविलिया सी चहक और तैयारियों की अफरातफरी। चिंता इतनी कि कहीं कुछ उलटा-पुलटा न हो जाये। परफारमेंस के लिए तैयार होकर बैठी लड़कियां जीत का जज्बा अपने अंदर बो चुकी थीं और फसले बहारा की कल्पना में उनका सर्वाग झूम रहा था। यह रांची वीमेंस कॉलेज में यूथ फेस्टिवल का समां है, जिसे हर कोई देखते हुए आंखों में उतार लेना चाहता है। ठीक इसी तरह का नजारा विवि प्रांगण के सिनेट हॉल का भी है। ये दो वेन्यूज अपनी दरो-दीवार में यूथ फेस्टिवल के बहाने रंग, थिरकन, खुशी, गम, जज्बा और रवायत के सार एहसास समेट लेना चाहते हैं। पता नहीं, यह महामिलन फिर कब हो।ड्ढr बात रांची वीमेंस कॉलेज की करं, तो यहां युवा महोत्सव सिर्फ उत्सव नहीं है। सैकड़ों का हुाूम एक चाक-चौबंद व्यवस्था में अपनी-अपनी भागीदारी और जिम्मेवारियां समझते हुए शरद के ओस सने खेतों में धान की बालियों सा लहराता अपनी दुनिया में मगन है। बीसेक यूनिवर्सिटीा से आये छात्रों का दो सेंटर्स पर महामिलन हो रहा है। पठार पर बसे इस शहर में एक छोटी दुनिया बन गयी है- खालिश युवाओं की। तरुणाई की। इस दुनिया में उमंग है, जीत की ख्वाहिश है, ढोल-नगाड़ों पर थिरकते पांवों की जुंबिश है, उत्सव का सारा रस एकबारगी पी लेने की अधीरता भी है। यह महोत्सव उस समय हो रहा है, जब विश्व के लोग आतंक के मुद्दे पर बहस कर रहे हैं, त्रस्त और संतप्त हैं। पर यहां हर सीने ने आतंक का घाव छुपाकर हंसने की ठानी है। उनकी हंसी कहीं से बनावटी नहीं है। बिलकुल उन्मुक्त और निश्छल है उनकी हंसी। दुनिया कुछ इस तरह चलती है यारो-यह संदेश हर शय देता नजरड्ढr आता है।प्रतियोगिताएं हैं, नृत्य-गीत का माहौल है, जवानी की अदाएं हैं, दूरियां पाटने की कोशिश है। प्रेम है, अनुराग है, फिकर है, इंतजार है, मेहनत है, थकान है- फिर भी गुलजार सारा जहान है। वीमेंस कॉलेज में साइंस ब्लॉक का विशाल प्रांगण हो या आर्ट ब्लॉक की झुरमुट- हर ओट से अचानक कोई खुशगवार युवा झोंका निकलता है और सार बंध तोड़ता हुआ नदियों की तरह एकाकार हो जाता है। अलग-अलग भंगिमाएं सर्वत्र दिखती हैं सुबह से शाम तक। तब तक, जब तक अपने पराफारमेंस को अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प पूरा न हो जाये। तमाम शिक्षिकाएं, प्रतिभागी, स्टाफ अपनी-अपनी भूमिकाओं में मशगूल हैं। कॉलेज की बगिया में एकसाथ इतनी पुष्पवर्षा हुई है कि सारा चमन महक उठा है। मुट्ठियां भिंची हैं, नसें तनी हैं, पर यह भंगिमा सृजन के लिए है। ध्वंस के लिए तो कतई नहीं।ं

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