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पेट्रोल हुआ पांच रुपये सस्ता, डीजल दो रुपये

सरकार ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीाल की कीमतों में क्रमश: पांच रुपये और दो रुपये प्रति लीटर की कटौती करने का फैसला किया। लेकिन एलपीजी सिलेंडर और केरोसिन तेल के दाम पहले की तरह ही रहेंगे। नए दाम आधी रात से लागू भी कर दिए गए। सरकार ने पिछली जून में पेट्रोल और डीाल की कीमतों में प्रति लीटर पांच रुपये और तीन रुपये का इजाफा किया था। उस समय कच्चे तेल के दाम 122 डॉलर प्रति बैरल पर थे। हालांकि सरकारी तेल कंपनियां अभी नहीं चाहती थी कि दाम कम हों। इन्हें लम्बे समय तक पेट्रोल तथा डीाल की बिक्री पर नुकसान झेलने के बाद पिछले महीने से से ही लाभ होना शुरू हुआ था। सरकार के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया जताते हुए इंडियन ऑयल के एक उच्च अधिकारी ने कहा कि वह (सरकार) चाहती ही नहीं कि तेल कंपनियों की सेहत सुधर। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक आला अधिकारी ने बताया कि सरकार ने शुक्रवार को विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम 43 डॉलर प्रति बैरल आने के बाद उपयरुक्त फैसला लिया। केरोसिन और एलपीजी सिलेंडर के दाम इसलिए नहीं कम किए गए क्योंकि सरकारी तेल विपणन कंपनियों को इनकी बिक्री पर अब भी प्रति लीटर 22.40 रुपये और 343.4ा नुकसान हो रहा है। इसके विपरीत पेट्रोल और डीाल की बिक्री पर प्रति लीटर 10 रुपये और दो रुपये का लाभ होना शुरू हो गया। महत्वपूर्ण है कि करीब दो महीने पहले जब मैकोंी एंड कंपनी ने आकलन दिया था कि विश्व बाजार में आगामी साल के अंत तक कच्चे तल के भाव 200 डॉलर प्रति बैरल को छूने लगेंगे तो दुनिया भर में आतंक फैल गया। बहरहाल दाम 147 डॉलर तक ही गये। अंतरराष्ट्रीय तेल के दाम बढ़ने से भारत की तेल विपणन कंपनियों को भारी घाटा हुआ। हालात इतनी खराब हो गई कि उनके पांच-सात दिन के तेल आयात का भी इंतजाम नहीं रहा। सरकार ने ऑयल बॉन्ड भी जारी किये। पिछली 16 नवम्बर से सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल,ऑयल इंडिया लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम प्रति लीटर पेट्रोल की बिक्री पर पये तथा डीाल पर प्रति लीटर 70 पैसे का लाभ कमाने लगी थीं। तब कच्चे तेल के दाम 68 बैरल प्रति डॉलर पर आ गए थे।

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