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मकान, दुकान व वाहन के लिए कर्ज होंगे सस्ते

विश्वव्यापी आर्थिक मंदी के असर से सुस्त पड़ती घरेलू अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने के लिए रिजर्व बैंक ने शनिवार को रेपो और रिवर्स रेपो दर दोनों में एक प्रतिशत कमी कर मकान, दुकान और वाहन खरीदने के लिए कर्ज सस्ता करने की दिशा में एक और पहल की है। रिजर्व बैंक गवर्नर डा. डी सुब्बाराव ने रेपो दर एक प्रतिशत घटाकर 6.5 प्रतिशत और रिवर्स रेपो दर को एक प्रतिशत घटाकर 5 प्रतिशत करने की घोषणा की। रेपो दर वह दर होती है जिस पर बैंक अपनी अल्पकालिक जरूरतों के लिए रिजर्व बैंक से धन लेते हैं और जब बैंक अपनी अतिरिक्त राशि को कुछ समय के लिए रिजर्व बैंक के पास रखते हैं तो उन्हें रिवर्स रेपो दर पर ब्याज मिलता है। इस प्रकार अब बैंकों को रिजर्व बैंक से सस्ती दर पर राशि उपलब्ध होगी। केन्द्रीय बैंक ने लघु औद्योगिक इकाईयों की मदद के लिए भारतीय राष्ट्रीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के पास 7000 करोड रुपये की पुनर्वित सुविधा को भी मंजूरी दे दी। रिजर्व बैंक गवर्नर ने आवास विकास क्षेत्र में गतिविधियां तेज करने के लिए राष्ट्रीय आवास बैंक को भी 4000 करोड़ रुपये तक की पुनर्वित सुविधा का ऐलान किया है। सिडबी और आवास बैंक को अधिक पुनर्वित सुविधा देकर रिजर्व बेंक ने लघु इकाईयों और आवासीय क्षेत्र की गतिविधियों में नए सिरे से स्फूर्ति लाने का प्रयास किया है। दुनिया में आर्थिक संकट की शुरुआत से ही उद्योग जगत ब्याज दरों में कमी की मांग करता आ रहा है। वाणिय एवं उद्योग मंडलों का कहना है कि घरेलू बाजार में मांग बढ़ाने के लिए बैंकों से सस्ता कर्ज मिलना जरूरी है। रिजर्व बैंक के घोषित उपाय इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। रिजर्व बैंक गवर्नर ने मौद्रिक उपायों की घोषणा करते हुए यह भी कहा कि चालू वित्त वर्ष की समाप्ति तक मुद्रास्फीति की दर सात प्रतिशत से काफी नीचे रहेगी। इससे पहले केन्द्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति की अर्धवार्षिक समीक्षा में इसके साल के अंत तक 7 प्रतिशत तक रहने की उम्मीद जाहिर की थी। सरकार द्वारा शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल के दाम कम करने के बाद मुद्रास्फीति में तीव्र गिरावट की उम्मीद की जा रही है। डा. सुब्बाराव ने कहा है कि विश्व बाजार से जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं उससे मंदी और गहरा सकती है। इस स्थिति में भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति मिली जुली रहेगी। चालू वित्त वर्ष मंे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर कुछ धीमी रहकर 7.5 प्रतिशत से भी कम रह सकती है। अर्धवार्षिक समीक्षा में रिजर्व बैंक ने जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.5 से आठ प्रतिशत तक रखा था। देश की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सेवा क्षेत्र की धीमी वृद्धि और अक्टूबर में निर्यात कारोबार में गिरावट आने से जीडीपी वृद्धि की चाल सुस्त रहने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। उधर रिजर्व बैंक के इस फैसले से पहले ही भारत में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बाद देश का दूसरा बड़ा बैंक आईसीआईसीआई ने अपने ब्याज दरों में 1.5 फीसदी की कटौती का ऐलान किया। ब्याज दर में यह कटौती 20 लाख तक के होम लोन पर लागू होगा। आईसीआईसीआई बैंक बड़े पैमाने पर लोन देती है और यह देश का सबसे बड़ी कर्जदाता बैक है।

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  • Web Title: मकान, दुकान व वाहन के लिए कर्ज होंगे सस्ते