अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अल्लाह का इस्लाम मानो, मुल्लाओं का नहीं: शाहरुख

बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान का कहना है कि आतंक और सुरक्षा चूक के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। मुंबई में आतंकी हमले को पूर देश के लिए ‘बदलाव का ऐतिहासिक वक्त’ माननेवाले किंग खान का कहना है कि इस समय इस्लाम की दो धाराएं चल रही हैं। एक वह जो अल्लाह की चलाई हुई है- और जिसके विरुद्ध वह नहीं हैं, और दुर्भाग्य से दूसरी धारा वह है जो मुल्लाओं द्वारा चलाई गई है। शाहरुख ने अल्लाह के इस्लाम में ईमान लाने की जरूरत बताते हुए उन सबसे अपील की कि युवाओं को कृपया कुरान की सही सीख दें। ‘हिन्दुस्तान टाइम्स-सीएनएन-आईबीएन सिटिांस अगेंस्ट टेरर’ पहल में राजदीप सरदेसाई के साथ एक इंटरव्यू में शाहरुख ने कहा, ‘मुंबईकर होने से अधिक मैं एक भारतीय होने की भावना के साथ चीजों को अनुभव करता हूं। इससे से बड़ी बात मुझे यह सोचना चाहिए कि मैं एक पढ़ा-लिखा और उदारवादी मुसलमान हूं और मेरी पत्नी हिन्दू है, जिससे मुझे दो बच्चे भी हैं।’ उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि हम बहुत ही चिंतित हैं, शंकालु हैं, क्रुद्ध हैं और ऐसा होने का हमें हक है। इस समय हम विभिन्न क्षेत्रों में इससे निकलने का रास्ता खोज रहे हैं। लेकिन मैं खासकर युवाओं से कहना चाहूंगा कि इस तरह की चिंता, क्रोध और शंकाओं से विचलित न हों। बल्कि इसका इस्तेमाल रचनात्मक, और बदलाव लाने के लिए आक्रामक कदमों में करं। उन्होंने कहा कि युवाओं में जोश भरने की जरूरत है। अगर आप अपने युवाओं को दुनिया में कही भी आतंक फैलाने जसे कामों के लिए भेज सकते हैं तो सच मानिए कि इस देश का युवा सकारात्मक कामों में भी उसी जोश से उतर सकता है। उन्होंने कहा कि हिन्दू और इस्लाम दोनों तरह की कट्टरता के खिलाफ कानून बनना चाहिए कि कोई भी राजनीतिक दल का एजेंडा सांप्रदायिक नहीं होगा। चाहे वह बड़ी पार्टी हो या छोटी। किसी भी संगठन को कुरान या गीता या किसी भी धार्मिक ग्रंथ की गलत व्याख्या करने की क्षाजत नहीं मिलनी चाहिए। शाहरुख ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा इनकार करता रहा है और हममें से बहुत का यह मानना है कि उसपर हमला कर देना चाहिए। हमें इस तथ्य को स्वीकारना चाहिए कि आतंकियों को वहां प्रशिक्षण मिलता है। हम यह दावा नहीं कर सकते कि सरकार उन्हें प्रशिक्षित कर रही है, हमें केवल यह कहना चाहिए कि वे वहां ट्रेनिंग ले रहे हैं। क्या सरकार कुछ कर सकती है? अवश्य हम कर सकते हैं। हमें उनके सफाए के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं ईमानदारी से कहना चाहता हूं कि मैं इतना स्वार्थी नहीं बन पाया हूं कि नेता बन जाऊं। लेकिन अगले पांच सालों में मैं स्वार्थी बनना चाहता हूं, ताकि देश के लिए कुछ कर सकूं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: ‘अल्लाह का इस्लाम मानो, मुल्लाओं का नहीं’