DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पुस्तक मेले में युवाओं ने खोलीं मन की परतें

परीक्षा के तनाव से कैसे बचें। बेरोगारी से पैदा हुई निराशा को कैसे दूर करं। मां-बाप की कसौटी पर खरा उतरने के लिए क्या करं। ऐसे ढेरों सवालों के साथ पुस्तक मेला में आए युवाओं ने अपने मन की परतें खोलीं। शनिवार को पुस्तक मेले में ‘हिन्दुस्तान’ के मंच पर ‘आमने-सामने’ कार्यक्रम में पहुंचे लोगों ने ऐसे सवालों की लंबी फेहरिस्त पेश की, जिनका वहां मौजूद विशेषज्ञों ने सटीक जवाब सुझाया। मौका था ‘फैमिली काउंसिलिंग’ का और विशेषज्ञ थे डा. विनय कुमार और बिन्दा सिंह।ड्ढr ड्ढr कार्यक्रम में आए लोंगों ने जिनमें युवाओं की खासी तादाद थी, कैरियर, तनाव, युवाओं की आम समस्याओं और माता-पिता के साथ संबंधों पर ढेर सार सवाल किए। परीक्षा के वक्त होने वाले तनाव से कैसे निपटें यह सवाल किया मनीष अनुभव ने। इस सवाल के जबाव में डा. विनय कुमार ने कहा कि टाइम मैनेजमेंट और टाइम टेबल को फॉलो कर इस तनाव से बच सकते हैं।ड्ढr ड्ढr नौकरी नहीं मिलने के कारण तनाव से गुजर रहे संजीव के सवाल के जवाब में डा. कुमार ने कहा कि जरूरत खुद को आंकने की है। उन्होंने कहा कि हताशा से उत्पन्न तनाव का एकमात्र समाधान क्रियेटिविटी है। अरुण कुमार अकेला ने पूछा कि दूसर देशों में कॅरियर की दिशा कैसे तय की जाती है। डा. कुमार ने बताया कि पश्चिमी देशों में कॅरियर की दिशा तय करने का एक अलग सिस्टम है। उन्होंने छात्रों को बताया कि कॅरियर की दिशा तय करने में शिक्षक आपके सबसे मददगार हो सकते हैं। जेनरशन गैप पर ओम प्रकाश के सवाल पर बिन्दा सिंह ने कहा कि आज युवाओं और बुजुर्गो को एक-दूसर को समझने की आवश्यकता है। इसी सवाल के जवाब में डा. विनय कुमार ने कहा कि वैश्वीकरण के इस दौर में पूरा विश्व युवाओं और बुजुर्गो के बीच आ गया है। इसलिए इस समस्या को सावधानी से सुलझाने की आवश्यकता है। इसके अलावा कई अन्य लोगों ने भी सवाल किए जिसमें धनंजय कुमार, संजय कुमार, अमित आदि शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन अवधेश प्रीत व अरुण कुमार ने किया।ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: पुस्तक मेले में युवाओं ने खोलीं मन की परतें