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26 फरवरी, 2020|11:54|IST

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स्तन कैंसर पर डॉक्टर से बात नहीं करती हैं महिलाएं

स्तन कैंसर पर डॉक्टर से बात नहीं करती हैं महिलाएं

जागरूकता का अभाव, अधिक उम्र में संतान को जन्म देना और नवजात को अधिक समय तक स्तनपान न करा पाने जैसे कारणों के चलते भारत में स्तन कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जबकि महिलाएं इस समस्या के बारे में डॉक्टर से खुल कर बात नहीं कर पातीं।

ओंकोलॉजिस्ट भावना सिरोही ने कहा कि बड़ी संख्या में महिलाएं आज घर से बाहर काम कर रही हैं और उन्हें ऐसे हालात का सामना करना पड़ता है, जिसकी वजह से उन्हें स्तन कैंसर हो सकता है। कामकाजी महिला के विवाह में अकसर देरी होने के कारण पहली संतान का जन्म भी देर से होता है।

नौकरी की व्यस्तता और उसी के अनुरूप दिनचर्या होने के कारण कामकाजी महिलाएं बच्चों को अधिक दिनों तक स्तनपान नहीं करा पातीं। ये कारण निश्चित रूप से स्तन कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं, लेकिन महिलाओं को सबसे पहले क्षिक्षक से उबरना होगा और उन्हें स्तन कैंसर के बारे में डॉक्टर से खुल कर बात करनी चाहिए।

स्तन कैंसर के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए अभियान चला रही कैंसर सोसायटी की मानद सचिव अर्चना गोविल कहती हैं कि मासिक धर्म की जल्द शुरुआत और रजोनिवृत्ति विलंब से होना भी स्तन कैंसर का कारण होता है। अनुवांशिकी भी इसमें अहम भूमिका निभाती है। हालांकि भारत में स्तन कैंसर की दर पश्चिमी देशों की तुलना में कम है, लेकिन चिंता की बात यह है कि इस बीमारी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और आज भी हमारे समाज में, हमारे घरों में इतना खुलापन नहीं आ पाया है कि स्तन कैंसर के बारे में बेझिझक बात की जा सके।

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  • Web Title:स्तन कैंसर पर डॉक्टर से बात नहीं करती हैं महिलाएं