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जरदारी को ‘मुखर्जी’ के फोन ने होश उड़ा दिये

मुंबई हमलों के दौरान किसी ने खुद को विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी बताते हुए पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को फोन किया जिससे पाकिस्तान में हलचल मच गई थी। यह फोन कॉल 28 नवंबर को देर रात किया गया था। तब भारतीय सुरक्षा बल मुंबई में ताज होटल और ओबरॉय होटल में घुसे आतंकवादियों से लोहा ले रहे थे। फोन करने वाले ने खुद को मुखर्जी बताते हुए कथित रूप से धमकी भरे लहजे में बात की। उच्च पदस्थ कूटनीतिक और अन्य स्रेतों ने बताया कि फोनकर्ता न कथित रूप से जरदारी स कहा कि अगर पाकिस्तान ने हमलों के सरगनाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो भारत सैन्य कार्रवाई करेगा। उसके अगले दिन 2नवंबर को कुछ पाकिस्तानी अखबारों और टेलीविजन चैनलों ने यह रिपोर्ट दी कि मुखर्जी ने जरदारी को फोन पर धमकियां दीं। इन रिपोर्टों में यह साफ नहीं किया गया था कि यह फोन किसको किया गया था। साथ ही उनकी रिपोर्टों में स्रेत भी अस्पष्ट था। सूत्रों ने बताया कि इस तरह के किसी टेलीफोन कॉल से पहले ढेर सारी तैयारियां की जाती हैं। इस क्रम में टेलीफोन कॉल का विशिष्ट समय भी तय किया जाता है। पाकिस्तानी दैनिक द ‘डॉन‘ की एक रिपोर्ट के अनुसार जब शुक्रवार को यह फोन कॉल आई तो जरदारी के स्टाफ के कुछ वरिष्ठ सदस्यों ने मुंबई हमलों के चलते दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के मद्देनजर इस तरह के मौकों के लिए तय मानक को दरकिनार करन का फैसला किया और कॉल जरदारी को भेज दी गई।ड्ढr ड्ढr रिपोर्ट में कहा गया है कॉल करने वाले ने अपना परिचय प्रणव मुखर्जी के रूप में दिया और (पाकिस्तानी) राष्ट्रपति की मेल-मिलाप की भाषा की अनदेखी करते हुए मुंबई हमलों के सरगनों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने में पाकिस्तान के नाकाम रहने पर सैन्य कार्रवाई की सीधी धमकी दी। सूत्रों के अनुसार भारतीय उच्चायोग के अधिकारी इन रिपोर्टों पर हैरान थे। उन्होंने मामल की तह तक जान के लिए जांच पड़ताल शुरू की। पाकिस्तानी अधिकारियों से संपर्क किए गए। वहां से छन कर आने वाली सूचनाओं की क्रास चकिंग भारतीय अधिकारियों से की गई। जब यह तथ्य स्थापित हो गया कि किसी फर्जी फोनकर्ता ने राष्ट्रपति कार्यालय से संपर्क किया था। इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान को सूचित किया कि 28 नवंबर के उस फोन कॉल से उसका कोई लेना देना नहीं है। एक साफ संदेश भेजा गया कि फोन कॉल फर्जी था और इस नाजुक समय में इससे आपसी तनाव नहीं बढ़ना चाहिए। बहरहाल फोन कॉल के इस मामल की कई गुत्थी अब भी सुलझी नहीं है। यह अब भी साफ नहीं हो सका है कि फोनकर्ता कैसे दो देशों के नेताओं बीच होने वाली फोन कॉलों से संबंधित प्रोटोकाल का उल्लंघन करने में सफल हुआ।ड्ढr ड्ढr सूत्रों ने बताया कि दो देशों के नेताओं के बीच इस तरह के संपर्क करने के लिए दोनों देशों के राजदूतों को कई घंटे पहले ही उसकी सूचना दे दी जाती है। डॉन की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस फर्जी काल के बाद पाकिस्तानी राष्ट्रपति कार्यालय में अनेक लोग मान चुके थे कि भारत ने जंग के नगाड़े बजाने शुरू कर दिए हैं। लिहाजा ये संकेत अधिकारियों को भेजे जाने शुरू हो गए कि कैसे दोनों देशों के बीच के तेजी से बिगड़ते हालात काबू से बाहर निकल जा सकते हैं। उस वक्त के हालात ऐसे थे कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को सलाह दी गई कि वह फौरन लाहौर से राजधानी इस्लामाबाद लौट आएं। इतना ही नहीं, भारत की यात्रा पर गए पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को लेन के लिए 2नवंबर को सुबह-सवेरे पाकिस्तानी वायुसेना के प्रमुख का विमान भेज दिया गया। यह तब किया गया जब वह उसी दिन शाम में पाकिस्तान एयरलाइंस के विमान से स्वदेश लौटने वाले थे। मामला यहीं खत्म नहीं हो गया। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान सरकार ने अमेरिका समेत विश्व शक्तियों से संपर्क किया और उन्हें धमकी भरे टेलीफोन कॉल से बाखबर कराया। भारत सरकार को इस फोन काल के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। यह मामला तब सामने आया जब जरदारी ने खुद इसका जिक्र भारत में अपने एक मित्र से किया।

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  • Web Title: जरदारी को ‘मुखर्जी’ के फोन ने होश उड़ा दिये