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रहिमन जिह्वा बावरी

इस बावरी जीभ ने स्वर्ग पाताल सब एक कर दिया। इसकी बदौलत आकाश की ऊंचाइयों पर विराजे लोग पाताल में पटके गए। यह जीभ ख़्ाुद तो दांतों के किले में महफूज़ रहती है, पर बिचारे कपाल को हमेशा ही प्रहार सहने पड़ते हैं।ड्ढr रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गई सरग पाताल।ड्ढr आपु तो कह भीतर रही, जूती खात कपाल। अब तक सुना था कि तीन इंच लम्बी जीभ जब चलती है तो अपने सामने खड़े छ: फुटिये आदमी को क़त्ल कर सकती है, पर देखने में आ रहा है कि जीभ के स्वामी स्वयं ही धराशायी हो रहे हैं। टॉमसफुलर ने संसार को सावधान किया था कि यह गीली जगह रहती है, इसलिए हर पल फिसल जान का ख़्ातरा बना रहता है। जब भी देश-काल-व्यक्ित का विचार किए बिना कुछ कहा जाता है तो वह घातक बन जाता है। बड़े-बड़े हादसों के बाद देश के कर्णधार जब मंच पर आते हैं तो अनजाने में वह पहले से ही आहतों की चोटों को सहलाने और मरहम लगान की बजाय घाव हरे कर देते हैं। वक़्ता यदि संवेदनशील नहीं है, तो उसकी वाणी बेलगाम घोड़े की तरह भागती है। कभी-कभी उनकी भाषा में अभिव्यंजना शक्ित नहीं होती। बेहतर यह है कि जिस भी भाषा में वे सहज रूप से अपने भाव व्यक्त कर सकें, उसी में बोलें। किसी भी जाति या व्यक्ित-विशेष पर टिप्पणी करने से बचें क्योंकि अक्सर सज्जन होते हुए भी वे दुर्जन सिद्ध कर दिये जाते हैं। इन दिनों यही हो रहा है, एक बड़ी वारदात के बाद जब हमें सौहार्द की जरूरत तो है बहुत से लोग उसे विवाद दे रहे हैं। कबीर ने वाणी के महत्व पर गम्भीरता से सोचा है। मधुर-वचन दवाई का काम करते हैं ता कटु वचन तीर का जा कानों से प्रवेश करके सारे शरीर को सालते रहते हैं। इसीलिए ऐसा बोल बोला जाए जो स्वयं को भी ठंडा रखे और सुनने वाल को भी।

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