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बाजार के भरोसे न रहे रोचागार

आर्थिक संकट के चलते विभिन्न क्षेत्रोंे में नौकरियों में आ रही लगातार कमी के दौर में असंगठित क्षेत्रों के गठित राष्ट्रीय आयोग ने सरकार को आगाह किया है कि वह नागरिकों की रोी-रोटी से जुडे रोगार के मामले को सिर्फ बाजार की शक्ितयों के भरोसे न छोड़े। आयोग के मुताबिक अगर सरकार इस मामले में सिर्फ निजी निवेश के बूते हाथ पर हाथ धर बैठी रहेगी तो आने वाले समय में स्थिति और भी खतरनाक रूप धारण कर लेगी। आयोग ने यह भी कहा कि अगर देश मेंीसदी की आर्थिक विकास दर लगातार हासिल की गई तो आगामी वर्ष 2017 तक देश से बेरोगारी रफूचक्कर हो जाएगी। लेकिन इसके लिए सरकार को चौतरफा नीतिगत माहौल बनाने की दिशा में चौकस रहना होगा। आयोग ने प्रधानमंत्री को सौंपी रिपोर्ट में कहा है कि अगले आठ साल तक सरकार को ऊंची विकास दर सुनिश्चित करनी होगी। इसके लिए प्रमुख रूप से जरूरी है कि सरकार असंगठित क्षेत्र पर अपना फोकस बनाये। देश की कुल कार्यशील जनसंख्या का सेीसदी इसी श्रेणी के अंतरगत आता है। अर्थविद अजरुन सेनगुप्ता की अध्यक्षता वाले इस आयोग ने कहा है कि सरकार को यह बात अच्छी तरह से समझने की जरूरत है कि बाजार की शक्ितयां यानी निजी निवेश ऊंची विकास दर हासिल करने में तो मदद कर सकता है लेकिन नौकरियों की संख्या बढ़ाने में अनिवार्य रूप से नहीं। इसके लिए तो वास्तव में सरकार को दूरदर्शी नीतियां बनाकर लागू करनी होगी। आयोग ने कहा कि आने वाले समय में देश के कुल कामगरों की संख्या में असंगठित क्षेत्र के कामगरों की हिस्सेदारी में कोई कमी आने की संभावना नहीं है।

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