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मुनी हांसदा को छुड़ा ले जाना चाहते थे लोग : गृह सचिव

उलगुलान मंच के लोग दुमका जेल में बंद मुनी हांसदा और उनके तीन समर्थकों को जबरन छुड़ा ले जाना चाह रहे थे। मुनी हांसदा और उनके समर्थक राजचरण और चरण कुमार भी इन्हीं कांडों के अभियुक्त हैं। तीनों जेल में बंद हैं। आंदोलन के जरिये दुमका जेल में धावा बोलकर इन तीनों को छुड़ाने की कोशिश की गयी थी। पुलिस ने जब ऐसा करने से रोका तब पुलिस पर पथराव और तीर-धनुष से हमला बोला गया। इसी क्रम में पुलिस ने गोली चला दी, जिससे एक व्यक्ित क मौत हो गयी है। दुमका में स्थिति नियंत्रण में है। दुमका के आइजी एचआर मिश्र, डीआइजी मदन मोहन ओझा, एसपी अरुण कुमार सिंह और उपायुक्त वहां कैंप कर रहे हैं। गृह सचिव ने बताया कि विधि-व्यवस्था तोड़ने की इजाजत किसी को नहीं दी जायेगी। यह पूछे जाने पर कि जो व्यक्ित मरा है, उसके परिजनों को मुआवजा मिलेगा या नहीं, इस पर गृह सचिव ने कहा कि फैसला सरकार लेगी। उधर झारखंड के विभिन्न जिलों में तैनात डीएसपी स्तर के 10 अधिकारियों को दुमका भेजा गया है, जो 15 दिसंबर तक वहां बने रहेंगे। डीजीपी वीडी राम, आइजी अभियान डीके पांडेय और अन्य पुलिस अधिकारी दुमका पर नजर रखे हुए हैं। मुझे तो पता ही नहीं : हेमलाल मुरमूड्ढr रांची। काठीकुंड में उलगुलान मंच के समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प और गोलीबारी के बार में झामुमो सांसद हेमलाल मुरमू का कहना है कि उन्हें इसके बार में जानकारी नहीं है। अखबार से ही वह घटना के बार में अवगत हुए हैं। फिलहाल वह दो दिनों से साहेबगंज में हैं और विभिन्न कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। ग्रामीणों को बहकाया गया : नलिन सोरनड्ढr रांची। कृषि मंत्री नलिन सोरन का कहना है कि उलगुलान मंच की मुन्नी हांसदा को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार किया था। बात यह है कि पुलिस ने एक मोटरसाइकिल जब्त की थी। पुलिस का कहना था कि कागज लाओ और मोटरसाइकिल ले जाओ। परंतु बहकावे में लाये गये कुछ लोग थाना में घुस कर मोटरसाइकिल छीन ले गये। उस समय थाना में तैनात अफसर पर हाथ भी छोड़ दिया। केस हुआ और वह गिरफ्तार हो गयी। इधर कुछ लोग पावर प्लांट का बहाना बना कर लोगों को बहकाते हुए छह दिसंबर को बैरिकेटिंग तोड़ कर आगे बढ़ गये। इसमें धनबाद और गिरिडीह के लोग भी शामिल थे। नलिन सोरन का कहना है कि ग्रामीणों को बहकाने की कार्रवाई गलत है। ऐसे असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई होनी चाहिए।ड्ढr भोले-भाले आदिवासियों को बहकाया गया : सीएमड्ढr रांची। काठीकुंड में ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुई गोलीबारी पर सीएम शिबू सोरन ने कहा है कि वहां जो कुछ हुआ है, उसमें बाहरी तत्वों का हाथ है। उन्होंने कहा है कि सीधे-सादे आदिवासियों को सामने लाकर उन्हें गोली का शिकार बनवाया गया। ऐसा माहौल बनाया गया कि प्रशासन उन पर दंडात्मक प्रहार कर, उनपर गोली चलाने को विवश हो।ड्ढr सरकार का आदिवासी विरोधी चेहरा सामने आया : मालेड्ढr भाकपा (माले) ने काठीकुंड - आमगाछी इलाके में पुलिसिया दमन का आरोप लगाते हुए इसकी निंदा की है। इसके खिलाफ पार्टी की ओर से सात और आठ दिसंबर को संथाल परगना के विभिन्न जिलों में विरोध दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। पार्टी के राज्य सचिव जर्नादन प्रसाद ने कहा है कि हत्या के जिम्मेदार थानेदार को मुअत्तल किया जाए और गोलीचालन में शामिल पुलिस कर्मियों पर हत्या का मुकदमा चलाया जाए। यूपीए सरकार और उसके मुख्यमंत्री आदिवासियों को बेदखल होने से बचाने की जगह उनके विरोध को कुचलने पर आमादा हैं। इससे मुख्यमंत्री का आदिवासी विरोधी के रूप में स्थापित हो रहा है।ड्ढr चिंताजनक है प्रदेश के राजनीतिज्ञों की चुप्पीड्ढr ऑल इंडिया आदिवासी यूथ एंड स्टूडेंट्स यूनियन (एआइएवाइएसयू) के प्रदेश सचिव वसंत बबलू सोरन, उप सचिव संजय बेसरा, संयुक्त सचिव विनोद मुमरू और मांझी बास्की, राजाधन मरांडी, चिंतु बेसरा ने दुमका में आदिवासियों पर पुलिस फायरिंग की निंदा करते हुए कहा है कि प्रशासन हमेशा आदिवासियों की आवाज को दबाना चाहती है। इस मामले में प्रदेश के राजनीतिज्ञों की चुप्पी चिंता पैदा करने वाली है।ड्ढr सीएम और मानवाधिकार आयोग के पास विरोध दर्ज करने का आह्वानड्ढr नेशनल एलायंस ऑफ पीपुल्स मूवमेंट ने दुमका में शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस फायरिंग और कॉरपोरट घरानों के ईशार पर सामूहिक विस्थापन के खिलाफ लोगों से मुख्यमंत्री शिबू सोरन ओर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पास अपना विरोध दर्ज करने का आह्वान किया है।ड्ढr

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