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राजस्थान में स्पष्ट बहुमत नहीं, कांग्रेस को बढ़त

दो सौ सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है लेकिन कांग्रेस सीटें लेकर सबसे बड़ी पार्टी के रुप में उभरी है वहीं सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने की घोषणा की है। तेंरहवी विधानसभा के लिए गत चार दिसबंर को हुए मतदान के बाद सोमवार को हुई मतगणना की शुरुआत में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने बराबर बढ़त बनाए रखी लेकिन वह स्पष्ट बहुमत से वंचित रही। कांग्रेस को थान पर संतोष करना पड़ा। भाजपा 78 सीट लेकर दूसरे स्थान पर रही। निर्दलीय एवं अन्य दलों को 26 स्थान मिले। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे झालरापाटन से 32324 वोटों से चुनाव जीत गई है। वसुंधरा मंत्रिमंडल के नौ कैबिनेट मंत्री और दो रायमंत्री चुनाव जीत गए है जबकि छह कैबिनेट मंत्री इतने ही रायमंत्रियों को चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है। इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरदारपुरा में 14 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की है। लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा. सीपी जोशी को नाथद्वारा में मात्र एक वोट से चुनावी सफलता से वंचित होना पड़ा। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बीडी कल्ला और नारायण सिंह तथा कार्यकारी अध्यक्ष परसराम मोरदिया को भी पराजय का सामना करना पड़ा। इस बीच मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और प्रदेश अध्यक्ष सांसद आेमप्रकाश माथुर ने पार्टी नेताआें के साथ चुनाव नतीजों की समीक्षा की। पार्टी ने विधायक दल की मंगलवार को बैठक बुलाई है। पार्टी कार्यालय से अपना इस्तीफा सौंपने के लिए राजभवन जाने से पहले वसुंधरा राजे ने कहा कि भाजपा रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएगी। उधर कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिए प्रयास आरंभ कर दिए है। राजस्थान विधानसभा चुनाव के अंतिम परिणाम में दलीय स्थिति इस प्रकार रही। कुल सीटें थीं 200, चुनाव हुए 200 पर । जिसमें कांग्रेस को सीटें, भाजपा को 78, निर्दलीय एवं अन्य दलों को 26 स्थान मिले।

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