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लश्कर पर पाक एक्शन पर विशेषज्ञ की प्रतिक्रिया

सुविख्यात आंतरिक सुरक्षा विशेषज्ञ अजय साहनी ने कहा है कि मुजफ्फराबाद में लश्कर के कैंप पर की गई पाक सरकार की कार्रवाई में आतंक पर लगाम की सच्ची मंशा कम थी और ड्रामा ज्यादा था। उनकी राय में पाक सरकार ने अमेरिका और भारत के दबाव में महा एक टोकन एक्शन की कवायद की। इंस्टीटय़ूट फॉर कॉनफ्लिक्ट मैनेजमेंट और साउथ एशिया टेररिम पोर्टल से जुड़े साहनी मानते हैं लखवी नाम के जिस आतंकवादी सरगना को गिरफ्तार किए जाने की खबर आई है, मुमकिन है उसे कुछ दिन गेस्ट हाउस में ठहराने के बाद रिहा कर दिया जाए। वैसे ही, जसे वर्ष 2002 में दुनिया को दिखाने के लिए मुशर्रफ प्रशासन ने लश्कर चीफ को महा कुछ दिन के लिए नजरबंद कर दिया था। अगर पाकिस्तान सचमुच संजीदा होता तो वह खुद अपनी पहल पर काफी पहले कार्रवाई कर चुका होता। क्या पाकिस्तान को यह कार्रवाई अमेरिका के 48 घंटों के भीतर कुछ ठोस करने के अल्टीमेटम की वजह से करनी पड़ी? इस सवाल के जवाब में साहनी कहते हैं कि अल्टीमेटम आमतौर पर सार्वजनिक मंचों पर नहीं दिए जाते। लिहाजा इसकी पुष्टि करना संभव नहीं कि चेतावनी दी गई थी, लेकिन इसमें शक नहीं कि पाक पर अमेरिका का दबाव था। मैक्केन और कोंडिलिजा राइस ने भारत दौर के बाद इस्लामाबाद को दो टूक शब्दों में बता दिया था कि उसे कार्रवाई करनी ही होगी। इसीलिए पाक ने लश्कर के एक ठिकाने पर एक सांकेतिक सरीखी कार्रवाई कर दी। लेकिन क्या भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के बाद पनपी नई जुगलबंदी में अमेरिका पाकिस्तान पर पहले से ज्यादा कड़ाई से पेश आने की नहीं सोचेगा? इसके जवाब में साहनी कहते हैं कि अमेरिका आतंक के चक्र में पाकिस्तान की भूमिका को अच्छी तरह समझता है लेकिन उसके पास ज्यादा विकल्प ही नहीं हैं। वह अफगानिस्तान या इराक की तरह पाकिस्तान में तीसरा मोर्चा खोलकर नया सिरदर्द नहीं पालना चाहिए। फिलहाल वह इसी तरह कभी धमका कर तो कभी पुचकार कर ही पाकिस्तान से काम करवा सकता है। पाकिस्तानी निजाम जसा भी है, फिलहाल वह अफगानिस्तान में नाटो सेनाओं की मदद तो कर ही रहा है। प्रख्यात रक्षा विशेषज्ञ और इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व प्रमुख अजित डोभाल पाकिस्तान के सुरक्षा बलों की कार्रवाई की विश्वसनीयता और ईमानदारी पर अभी यकीन करने के लिए तैयार नहीं हैं। वे कहते हैं कि यदि उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में लश्कर तैयबा के आतंकियों पर कार्रवाई करके उन्हें पकड़ा है तो बेहतर होगा कि वे उन्हें भारत को सौंप दें। हालांकि भारत और पाकिस्तान के बीच आव्रजन संधि नहीं है, पर आतंकियों से सही प्रकार से छानबीन तो भारत में ही हो सकती है। अजित डोभाल कहते हैं कि पाकिस्तान के किसी भी दावे पर यकीन करना आसान नहीं है। उसका पुराना रिकार्ड बेहद निराशाजनक रहा है।अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के दबाव में पूर्व में हफीा मोहम्मद सईद और अजहर महमूद की भी गिरफ्तारी का नाटक कर चुकी है। बाद में मालूम चला कि इन दोनों को सिंध हाऊस में रखा गया था। वहां पर ये मौज काट रहे थे। नेवल कमोडोर एस. डी. सिन्हा का मानना है कि पाक ने यह कार्रवाई अमेरिका के दबाव में की है क्योंकि वह नहीं चाहता कि उसे दी जा रही भारी सैन्य सहायता रुक जाए। अमेरिका पाकिस्तान को एफ-16 के अलावा सभी लड़ाकू विमान, हथियार सप्लाई करता है। लगता है इस बार पाक की कार्रवाई दिखावा नहीं है क्योंकि स्थितियां काफी बदल चुकी हैं।

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