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1 अप्रैल, 2020|1:56|IST

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चिदंबरम के साथ मतभेद का अध्याय समाप्त: प्रणव

चिदंबरम के साथ मतभेद का अध्याय समाप्त: प्रणव

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि उनके और गृह मंत्री पी चिदंबरम के बीच मतभेद एक बंद हो चुका अध्याय है। उन्होंने जोर दिया कि चीजों पर सरकार का नियंत्रण है।

दुर्गा पूजा के लिए अपने पैतृक स्थल आए मुखर्जी ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि मैंने और चिदंबरम ने मीडिया से बातचीत की। अध्याय खत्म हो चुका है और वह (चिदंबरम) इस बात को स्वीकार कर चुके हैं। लिहाजा, यह सवाल ही नहीं उठता।

मुखर्जी ने स्वीकार किया कि बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था में कभी-कभी मतभेद हो सकते हैं। उनसे पूछा गया था कि उनका और चिदंबरम का सार्वजनिक रूप से एकसाथ सामने आना क्या इस बात का संकेत है कि विवाद खत्म हो चुका है।
   
सरकार में गंभीर मतभेद होने और आंतरिक फूट होने के चलते इसके किसी भी समय धराशाई होने के संबंध में पूछे गए सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि अगर आप विपक्ष की मूल परिकल्पना को मानें तो विपक्ष की भूमिका विरोध करना, पर्दाफाश करना और अगर संभव हो तो सरकार गिराना है।

मुखर्जी ने कहा कि उन्हें तथाकथित मतभेदों के अधिक अर्थ नहीं निकालने चाहियें। उन्हें खुद पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए क्योंकि आखिरकार वह (विपक्ष) भी कोई बहुत ज्यादा एकजुट कुनबा नहीं है। अगर आप उनके अतीत के रिकॉर्ड को देखें तो आप काफी कुछ ऐसा ही पायेंगे।

मुखर्जी ने कहा कि मुझे आपसे स्ट्रोब टालबोट की पुस्तक या दो मंत्रियों के बीच कंधार मामले में क्या हुआ, इस बात का उल्लेख करने की जरूरत नहीं है। मैं जानबूझकर नाम नहीं ले रहा। लिहाजा, चीजें साफ हैं। बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था में कभी-कभी मतभेद हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह इतना कह सकते हैं कि चीजें सरकार के नियंत्रण में हैं।

वित्त मंत्री ने जोर दिया कि मनमोहन सिंह की सरकार ने मजबूत नेतृत्व दिया है। पार्टी में मजबूत नेतृत्व सोनिया गांधी ने दिया है। पार्टी और सरकार के बीच सही समन्वय और तालमेल है। मुखर्जी ने उम्मीद जताई कि सरकार में एकजुटता होने के इस संदेश के साथ मतभेद होने की छवि दूर हो जाएगी।

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