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पटना के लोगों में सिविक सेंस नहीं

सड़क पर कचरा फेंकने और ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने वाले राजधानीवासियों में सिविक सेंस का घोर अभाव है। लोगों का नागरिक ज्ञान (सिविक सेंस) बढ़े इसके लिए उन्हें जागरूक करने की आवश्यकता है। ऐसा मामना है विशेषज्ञों का। ‘आमने-सामने’ कार्यक्रम में हिन्दुतान के मंच पर जुटे ट्रैफिक एसपी प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, तरुमित्रा के फादर राबर्ट एथिकल और प्रो. ए के चौधरी ने पुस्तक मेला में आए श्रोताओं के सवालों का जबाव देते हुए हा कि अभी राजधानीवासियों में सिविक सेंस उस स्तर तक नहीं डेवलप हुआ है, जो किसी महानगर में रहने वाले व्यक्ित के लिए आवश्यक है।ड्ढr ड्ढr राजधानी में ट्रैफिक सिग्नल के काम नहीं करने की वजह पर राजेश चौबे द्वारा पूछे गए सवाल के जबाव में ट्रैफिक एसपी ने स्वीकार किया कि राजधानी में कुल 17 स्थानों पर सिग्नल लगाए गए हैं। लेकिन ज्यादातर स्थानों पर यह काम नहीं कर रहा है। रामविलास चौधरी के सवाल के जबाव में प्रो. चौधरी ने कहा कि अभी नागरिकों में सिविक सेंस आने में समय लगेगा।ड्ढr ड्ढr उन्होंने कहा कि राजधानी की सबसे बड़ी समस्या धूल, धुआं और ध्वनि की है। प्रभात मिश्रा के सवाल के जबाव में ट्रैफिक एसपी ने कहा कि प्रदूषण कम करने की दिशा में सरकार प्रयास कर रही है। इसके लिए सीएनजी आदि से गाड़ियों के परिचालन की व्यवस्था की जा रही है। विपिन के सवाल के जबाव में फादर एथिकल ने कहा कि सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने के क्रम में सड़कों के किनार बनाए गए नौ गार्डन को उााड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि शहर के प्रदूषण पर काबू पाना है तो यहां ग्रीन बेल्ट बनाना आवश्यक है। ध्रुव कुमार के सवाल के जबाव में ट्रैफिक एसपी ने कहा कि सभी वाहनों के प्रदूषण की जांच की जाती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकर किया कि राजधानी में वाहनों से होने वाले प्रदूषण के सबसे बड़े दोषी अॉटो चालक हैं। कार्यक्रम में डीएन प्रसाद, राजकुमार, राहुल, रमेश कुमार समेत अन्य श्रोताओं ने भी सवाल किए।

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