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भाजपा का सांसदों को चुनाव लड़ाने का प्रयोग फेल

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में अपने सांसदों को विधानसभा का चुनाव लड़ाने का जो दांव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने खेला था वह असफल हो गया। पार्टी ने मुख्यत: स्वशासित राज्यों में सत्ता विरोधी लहर का मुकाबला करने के लिए यह कदम उठाया था। राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पार्टी ने बड़ी संख्या में अपने सांसदों को विधानसभा का टिकट देकर एक तरह से जुआ खेला था, लेकिन चुनाव परिणामों से पार्टी को निराशा हाथ लगी। दिल्ली में उसके इकलौते सांसद विजय कुमार मल्होत्रा जो पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भी थे, अपनी विधानसभा सीट जीतने में कामयाब रहे। राजस्थान में भाजपा ने पांच सांसदों को विधानसभा के चुनावी समर में उतारा था, जिनमें से मात्र एक को विजय मिली। राजस्थान से जीतने वाली उम्मीदवार रहीं पार्टी के महिला मोर्चा की अध्यक्ष किरण माहेश्वरी जबकि शेष चार सांसदों धनसिंह रावत, रघुवीर सिंह कौशल, श्रीचंद कृपलानी और निहालचंद चौहान को पराजय का सामना करना पड़ा। छत्तीसगढ़ में पार्टी ने दो सांसदों को विधानसभा का टिकट दिया था। यहां से एक सांसद ने जीत हासिल की जबकि दूसरे को पराजय का सामना करना पड़ा। राज्य में पुन्नूलाल मोहले अपनी सीट जीतने में कामयाब रहे लेकिन पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष और सांसद विष्णुदेव साय इतने भाग्यशाली नहीं रहे और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। मध्यप्रदेश में पार्टी ने सबसे अधिक सात सांसदों को विधानसभा चुनावों में उतारा था जिनमें से चार तो जीतने में कामयाब रहे जबकि तीन को हार का सामना करना पड़ा। यहां गौरीशंकर बिसेन, नीता पटेरिया, रामकृष्ण कुसमारिया और सरताज सिंह ने जीत हासिल की जबकि छतरसिंह दरबार, रामलखन सिंह और रामपाल सिंह को हार का मुंह देखना पड़ा। गौरतलब है कि भाजपा ने सत्ता विरोधी लहर से बचने के लिए यह कदम उठाया था। लेकिन मध्यप्रदेश में पार्टी को मिले भारी बहुमत के बावजूद चार सांसदों को पराजित होना पार्टी के लिए चिंता की बात है। चुनाव नतीजे आ जाने के बाद पार्टी अजीबोगरीब स्थिति में पड़ गई है। एक ओर तो उसके सामने दुविधा यह है कि जो सांसद अपनी विधानसभा सीट नहीं बचा पाए उन्हें आखिर आगामी लोकसभा चुनाव में किस आधार पर टिकट दिया जाए वहीं दूसरी ओर जीतने वाले उम्मीदवारों को लेकर पार्टी सोच में पड़ गई है कि उन्हें कुछ महीनों बाद होने वाला लोकसभा का चुनाव लड़वाया जाए या विधानसभा में ही रहने दिया जाए।

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  • Web Title: भाजपा का सांसदों को चुनाव लड़ाने का प्रयोग फेल