DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पाकिस्तान की मजबूरी

पाकिस्तान ने पहली बार कुछ ठोस कार्रवाई कर मुंबई हमलों के मास्टर माइंड लश्कर तैयबा के कमांडर जकीकुर रहमान लखवी को गिरफ्तार किया है। जेशे मोहम्मद के संस्थापक मौलाना मसूद अजहर को भी घर में नजरबंद किया गया है। यह शुरुआती कदम है और इससे यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा कि वह आगे भी कार्रवाई जारी रखकर आतंकवाद व आतंकियों पर काबू पाने में भारत के साथ सहयोग करेगा। यदि पाक शासक वाकई आतंक का खात्मा चाहते हैं तो उन्हें अपनी कथनी और करनी में भेद मिटाना होगा। कूटनीतिक ढोंग बंद कर अपनी भूमि पर चल रहे तमाम आतंकी शिविर को नष्ट करना होगा। मुंबई में हुए आतंकी हमलों के बाद अमेरिका व यूरोपीय देश सोचने को विवश हुए हैं कि पाक में पनपने वाले आतंकी किसी वक्त उनकी मुसीबतों का भी सबब बन सकते हैं। इसके मद्देनजर खासकर अमेरिका ने पाक पर आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का अत्यधिक दबाव बनाया, वर्ना पहले वह भारतीय आरोपों पर टालू रवैया अपनाकर उन्हें नजरअंदाज करता था। अमेरिका के कथित 48 घंटे के अल्टीमेटम पर लखवी की गिरफ्तारी और अजहर की नजरबंदी यह भी स्पष्ट करती है कि पाक हुक्मरान अपने आका अमेरिकियों की ज्यादा समय तक अनदेखी नहीं कर सकते। आतंक के खिलाफ जंग लड़ने के लिए अमेरिका उसे 10 अरब डालर की मदद दे चुका है, जबकि उसने इसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ सैनिक तैयारियों, शस्त्रास्त्रों की खरीद या भारत-विरोधी चरमपंथी संगठनों को मदद देने में किया। पाक सत्ता प्रतिष्ठान को डर सताने लगा है कि यदि अमेरिका और यूरोपीय देशों ने आर्थिक मदद रोक दी तो उसके सामने गंभीर कठिनाइयां खड़ी हो सकती हैं। लगता है कि उनके दबाव में उसे मजबूरीवश कार्रवाई करनी पड़ी। मुंबई के हमले में एक हमलावर कसाव के पकड़े जाने, उसके बयानों व उसके पाक नागरिक होने के पुख्ता सबूतों के बाद पाक सरकार के लिए दुनिया की आंखों में धूल झोंकना आसान नहीं रह गया है। अमेरिकी जांच एजेंसियों की रिपोर्टे भी पाक खुफिया संगठन आईएसआई की संलिप्तता की ओर इशारा कर रही हैं। यह अब पाक को तय करना है कि वह अंतरराष्ट्रीय सिरदर्द बने रहना चाहता है या दुनिया के खुशहाल राष्ट्रों की पंक्ित में शामिल होने का इच्छुक है?ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: पाकिस्तान की मजबूरी