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आर्थिक संसाधन में कमी वित्तीय प्रबंधन पर असरच

राज्य में राजस्व उगाही की स्थिति ठीक नहीं है। आंतरिक संसाधन के ग्रोथ रट में कमी के कारण विकास प्रभावित होने की स्थिति बन रही है। अब तक 2700 करोड़ ही जुटाये गये हैं। नवंबर माह तक लक्ष्य के विरुद्ध 33 प्रतिशत की ही वसूली होने से वित्तीय संतुलन गड़बड़ाने की नौबत बन गयी है। साल भर में 8448 करोड़ जमा करने का लक्ष्य था। अब चार माह में करीब 5800 करोड़ राजस्व संग्रहण का दायित्व है।ड्ढr राजस्व पर्षद ने पहले ही इस लक्ष्य को कम करार दिया था। वाणिज्य कर विभाग ने भी हाथ खड़ा कर दिया है। कहा है कि 4200 करोड़ रुपये का लक्ष्य विभाग के लिए पूरा करना संभव नहीं लग रहा। अभी तक 1400 करोड़ ही जमा हुआ है। अधिकतम 3500 करोड़ रुपये ही जुटाया जा सकता है। वैट के तहत राजस्व बढ़ाने और निबंधित प्रतिष्ठानों की संख्या में बढ़ोत्तरी की दिशा में काम नहीं हुआ है।ड्ढr राज्य में शराब की खपत में बेहताशा वृद्धि हुई है। कारोबार बढ़ने के बाद भी लक्ष्य के अनुरूप राजस्व नहीं मिल रहा है। अब तक केवल उत्पाद शुल्क से 500 करोड़ प्राप्त करने का लक्ष्य है। गाड़ियों की संख्या पांच गुनी से भी अधिक हो गयी ह,ै फिर भी राजस्व नहीं बढ़ पा रहा है। खनिजों के उत्खनन में रिकार्ड बढ़ोत्तरी होने की बात किसी से छिपी नहीं है, राजस्व उगाही में खान विभाग भी फिसड्डी है। पिछले माह सरकार ने अधिकारियों को तेजी से राजस्व बढ़ाने का निर्देश दिया था। इसका भी असर नहीं दिखा। अधिकारियों का मानना है कि इस स्थिति में राज्य के वार्षिक लक्ष्य को पूरा करना संभव नहीं लग रहा। आंतरिक संसाधन के ग्रोथ रट में कमी के कारण अगले साल की योजना कैसे तैयार होगी, अब यह सवाल उठ रहा है।

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