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सादगी से मनी ईद-उल-अजहा

ईद-उल-ाोहा का त्योहार मंगलवार को राज्य भर में अकीदत और सादगी के साथ मनाया गया। राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में ईदगाहों और मसजिदों में शुकराने की नमाज अदा की गयी। नमाज के बाद अल्लाह की राह में जानवरों की कुर्बानी दी गयी। तकरीबन सभी ईदगाहों और मसजिदों में कुर्बानी का तरीका बताया गया।ड्ढr मसजिदों के इमामों ने आतंकवाद पर भी तकरीर की। कहा गया कि आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता। इसलाम में हिंसा की कोई जगह नहीं है।ड्ढr नमाज के बाद देश राज्य की खुशहाली के लिए दुआ की गयी। मसजिदों और ईदगाहों में गले मिल कर लोगों ने एक-दूसर को बकरीद की बधाई दी।ड्ढr मसजिद-ए-ााफरिया में सुबह दस बजे नमाज अदा की गयी। ईदगाह के बाहर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने स्वागत शिविर लगा कर ईद-उल-अजहा की बधाई दी। बकरीद को लेकर मुसलिम बहुल इलाकों में काफी चहल पहल रही। नमाज के बाद घरों में कुर्बानियां दी गयीं। शाम होते ही समुदाय के बच्चे, लड़कियां और औरतें घूमने के लिए निकल पड़े।ड्ढr मुल्क के लिए कुर्बानी देने को रहें तैयार : मिसबाहीड्ढr हरमू रोड ईदगाह में ईद-उल-अजहा की नमाज मौलाना असगर मिसबाही ने पढ़ाई। नमाज से पूर्व उन्होंने अपनी तकरीर में कहा कि मुल्क की हिफाजत के लिए मुसलमान हमेशा तैयार रहें। अगर कुर्बानी भी देनी पड़े, तो सच्चे मुसलमान का र्फा निभाते हुए आगे आयें। दहशतगर्दो को मिटाने के लिए एकाुट रहें। आतंकवाद के लिए इसलाम में कोई गुंजाइश नहीं है।ड्ढr आज मुल्क, बल्कि पूरी दुनिया को फिरकापरस्ती से सबसे बड़ा खतरा है। दहशतगर्दो की सोच है कि मुसलमानों को बदनाम किया जाये। हमें कमजोर करना उनका मकसद है। बेकसूरों पर जुल्म की इसलाम ने हमेशा मुखालफत की है। इसलाम का अर्थ अमन है, जो सलामती का पैगाम देता है। इसमें औरत, बच्चे और बूढ़ों को मारने की इजाजत नहीं है। जो ऐसा करते हैं, वो इसलाम को माननेवाले नहीं हो सकते।ड्ढr अमेरिका और इजराइल चाहते हैं कि मुसलमान बदनाम हो। इसलिए वे मुसलमानों को आतंकवादी कहते हैं। उन्होंने कहा कि जुल्म करना जुर्म है और जुल्म सहना उससे बड़ा जुर्म है। इसलिए जुल्म कभी न सहें।ं

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  • Web Title: सादगी से मनी ईद-उल-अजहा