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रिक्शा चालक से बना शातिर लुटेरा

और देखते ही देखते रिक्शा चालक महेश केवट शातिर लुटेरा बन गया। नालंदा जिले के बिंद इलाके का मूल निवासी महेश पहले अपने गृह क्षेत्र में ही रिक्शा चलाकर अपना भरण-पोषण करता था। हालांकि आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए उसने दिल्ली जाकर रिक्शा चलाने की ठानी। दिल्ली पहुंच कर वह रिक्शा चलाने लगा।ड्ढr ड्ढr इसी क्रम में वह नशाखुरान गिरोह के शातिर सरगना बेगूसराय निवासी संजीव के संपर्क में आया। महेश की हकीकत जानने के बाद संजीव ने बड़ी होशियारी से उसे अपने झांसे में लेते हुए गिरोह में शामिल कर लिया। पहली बार आसानी से यात्रियों को शिकार बना उसने हजारों की संपत्ति लूटी। इसके बाद महेश ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और ट्रनों में वह ‘क्रीम बिस्किट’ में नशीला पावडर मिला कर भोले-भाले यात्रियों को शिकार बनाता रहा। छानबीन के दौरान महेश व अन्य लुटेरों की शातिर चाल सुन कर रल पुलिस भी चौंक गई। अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों से लूटे गये मोबाइल का ही उपयोग लुटेर करते थे।ड्ढr ड्ढr ऐसी स्थिति में लुटेरों तक पहुंचने या फिर उनका सुराग पाना पुलिस के लिए भी आसान नहीं रहता। रल पुलिस इंस्पेक्टर आलोक कुमार सिंह ने बताया कि यात्रियों से लूटे गये सोने-चांदी के आभूषण के मामले में पुलिस से बचने के लिए लुटेरों द्वारा काफी सतर्कता बरती जाती थी। पूछताछ में महेश केवट ने बताया कि लूट के तत्काल बाद जेवरात को सर्राफा दुकानों में गला दिया जाता है। फिर बाद में उसके वजन के आधार पर लुटेर करीब आधी कीमत पर सोने-चांदी को बेचते थे। हालांकि अब तक पटना में किसी दुकानदार से इन लुटेरों के संपर्क का पता नहीं चल रहा है। बहरहाल इस बाबत रेल पुलिस गहराई से पड़ताल कर रही है।

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