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चरमराया गिरिडीह का स्टील उद्योग

सोवियत संघ के विघटन के बाद 70 के दशक में गिरिडीह में माइका उद्योग भरभरा गया था। इस बार की वैश्विक मंदी ने यहां के स्टील उद्योग की चूलें हिला दी हैं। मंदी का दौर ऐसा ही रहा तो यहां की कई इकाईयां इस मार को झेल नहीं सकेंगी।ड्ढr इसी प्रकार में बेरमो अनुमंडल के अलग होने से इस जिला से कोयला उद्योग कट सा गया। इस बार के आर्थिक सुनामी ने इस्पात इंडस्ट्रीा को अंदर से हिला दिया है। गिरिडीह में स्टील उद्योग का सफर1से शुरू होता है। लाल, श्रीवीर, शिवम, बालमुकुंद, सालसर, निरांन, मोंगिया, बाबा, बरूण, रौनक सरीखे दर्जनों स्टील की इकाइयां यहां हैं। इन इकाइयों से प्रतिदिन लगभग डेढ़ हाार टन स्टील का उत्पात होता था।ड्ढr रॉलिंग मिल के अलावा स्पंज, फरनेस और स्टील से जुड़ी अन्य कई इकाइयां यहां लगी थीं। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से इस कारोबार से पचास हाार लोगों की रोटी जुड़ गयी। इस उद्योग से यहां प्रतिदिन करोड़ों रुपये का कारोबार होने लगा। किन्तु वैश्विक मंदी का गिरिडीह के इस उद्योग पर गहरा असर पड़ा। इन उद्योगों ने आर्थिक मंदी से बचने के लिए कई इकाइयां बंद कर दी हैं और कई ने घाटे को पाटने के लिए उत्पादन आधा कर दिया। मंदी यदि लंबी खिंच गयी, तो जनवरी माह से ही इसका भयावह रूप सामने आने लगेगा। अभी ही कई इकाइयों ने कास्ट कटिंग शुरू कर दी। ऐसे में जब मजदूरों की छंटनी होगी तो उग्रवाद से प्रभावित इस जिले में अपराध भी बढ़ेगा। ड्ढr

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  • Web Title: चरमराया गिरिडीह का स्टील उद्योग