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इंटर के मॉडल प्रश्न पत्र में कई अशुद्धियां

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा हाल में ही प्रकाशित इंटर विज्ञान विषय के मॉडल प्रश्न पत्र में काफी शाब्दिक अशुद्धियां हैं। छात्रों का कहना है कि अगर ऐसी गलतियां परीक्षा में हो जाए तो अंक कम ही मिलेंगे। गलतियों की शिकायत मिलने के बाद समिति भी हरकत में आ गयी है। इसको ढूढ़ने के लिए कमिटी ने जांच का कार्य शुरू कर दिया है। समिति के अध्यक्ष प्रो. एकेपी यादव ने बताया कि मॉडल प्रश्न पत्र सपोर्टिग पुस्तक है। आनन-फानन में छपाई के कारण कुछ स्पेलिंग संबंधी गलतियां रह गयी हैं। इन्हें दूर किए जाने का प्रयास शुरू कर दिया गया है। वहीं मंगलवार से बाजार में कॉमर्स विषय का भी मॉडल प्रश्न पत्र आ गया है।ड्ढr ड्ढr समिति के 12वीं रसायनशास्त्र के मॉडल प्रश्न पत्र के मॉडल एक के सेक्शन वन (ऑब्जेक्िटव) के प्रश्न सात के उत्तर डी में इलेक्ट्रोस्टैटिक चार्ज की जगह इलेक्ट्रोस्टैटिक चेंज लिखा गया है। वहीं प्रश्न 15 के स्टेटमेंट दो में लूज के स्थान पर लॉस लिखा गया है। वहीं मॉडल दो के सेक्शन टू (नन ऑब्जेक्िटव) के प्रश्न 15 में न्यूक्िलयोफाइल एडीशन रिएक्शन्स के स्थान पर न्यूक्िलयोफिलिक एडीशन रिएक्शन्स लिखा गया। इस प्रकार की अशुद्धियां अन्य विषय के भी मॉडल प्रश्न पत्र में है। पाटलिपुत्र कॉलोनी में रहने वाले छात्र दीनू कुमार ने बताया कि वस्तुनिष्ठ प्रश्न के उत्तर में भी कई स्थानों पर त्रुटियां हैं। इससे तैयारी प्रभावित हो रही है। दूसरी तरफ समिति का कहना है कि छात्रों को शीघ्रता से मॉडल प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने में यह दिक्कत सामने आयी है। अभी तो कम ही मॉडल पत्र प्रकाशित कराया गया है। आगे इसके प्रकाशन में इन गलतियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। वहीं अध्यक्ष ने कहा कि बेहतर तैयारी में मॉडल प्रश्न पत्र मदद करगा और छोटी-छोटी त्रुटियों को छात्र स्वयं दूर कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि मंगलवार से समिति के पुस्तक मेला में स्थित स्टॉल में कॉमर्स का मॉडल प्रश्न पत्र मिलना शुरू हो गया है। वहीं आर्ट्स विषय के मॉडल प्रश्न पत्र अगले सप्ताह बाजार में आ जायेंगे। वैश्विक दृष्टि आज समाज की जरूरतड्ढr पटना (का.सं.)। वैश्विक दृष्टि आज समाज की जरूरत है। समाज आज संकुचित दायर में काम कर रहा है। इस दायर से निकालकर समाज को आगे ले जाने की जरूरत है। पत्र-पत्रिकाओं में वैश्विक दृष्टि को बनाए रखना एक चुनौतीभरा काम है। पुस्तक मेले में बुधवार को कला समीक्षक सह साहित्यकार डा.शंकर प्रसाद द्वारा संपादित मासिक पत्रिका ‘आरोह-अवरोह’ के लोकार्पण समारोह में वक्ताओं ने उक्त बातें कहीं। लोकार्पण ‘हिन्दुस्तान’ के वरीय स्थानीय संपादक सुनील दुबे ने किया। अध्यक्षीय भाषण करते हुए प्रसिद्ध नाटककार व फिल्मकार राबिन शॉ पुष्प ने कहा कि हमें प्रांतवाद,जातिवाद व धर्म से ऊपर उठकर सोचना होगा। कहीं भी कोई आतंकी हमले व दंगे होते हैं तो कोई बिहारी या दिल्ली का व्यक्ित नहीं मरता है बल्कि इंसान की मौत होती है। सुख-दुख भी इस दायर में नहीं आता है।ड्ढr ड्ढr ये भी बिहारी या बंगाली नहीं होते हैं। उन्होंने अपनी फिल्म ‘डाकबाबू’ में शंकर प्रसाद के अभिनय की तारीफ करते हुए कहा कि वक्त आ गया है कि हम दूसर को समझें व परखें फिर कोई बात करं। कवि सत्यनारायण ने कहा कि बहुरंगी प्रतिभा के धनी शंकर बाबू मुक्ितबोध पर शोध करने वाले पहले व्यक्ित हैं। कथाकार सतीशराज पुष्करणा ने कहा कि इस पत्रिका में एक दृष्टि है। पत्रिका के संपादक डा. प्रसाद ने पत्रिका के बाबत कई जानकारियां दीं। इस मौके पर मिथिलेश कुमारी मिश्र व कमला प्रसाद ने भी अपने विचार रखे। संचालन ध्रुव कुमार व धन्यवाद ज्ञापन सीआरडी के सचिव अमरन्द्र झा ने किया। इस अवसर पर सीताराम यादव, राजकुमार प्रमी, श्रीकांत आदि भी उपस्थित थे।ं

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