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आर्थिक पिछड़ा राज्य का दर्जा मिले

आर्थिक और आधारभूत संरचना के फ्रंट पर बदहाली की तस्वीर दिखाकर व्यवसायियों और उद्योगपतियों ने तेरहवें वित्त आयोग से बिहार को आर्थिक रूप से पिछड़ा राज्य का दर्जा देने की गुजारिश की। गुरुवार को बिहार चैम्बर ऑफ कॉमर्स और बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने सूचना भवन में आयोग की टीम से मिलकर अलग-अलग ज्ञापन सौंपा। चैम्बर ने टैक्स छूट और अनुदान पर अधिक जोर दिया जबकि बीआईए ने आधारभूत संरचना के विकास को मुद्दा बनाया।ड्ढr ड्ढr दोनों संगठनों ने विभाजन से हुए नुकसान के एवज में राज्य को आर्थिक पैकेज देने, इस्पात कारखाना लगाने, आधारभूत संरचना विकास के लिए सालाना 50 हजार करोड़ रुपये अनुदान, केन्द्रीय करों में 15 साल तक छूट, केन्द्रीय करों में 30.5 की बजाय 50 प्रतिशत हिस्सा देने और कोसी की बाढ़ से निजात दिलाने के लिए विशेष सहायता मांगी। बीआईए के अध्यक्ष के.पी.झुनझुनवाला ने विकास का क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने के लिए राज्य को विशेष पैकेज देने के साथ ही खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विकास के लिए 1000 करोड़ रुपये, पर्यटन विकास के लिए 750 करोड़, चीनी उद्योग विकास के लिए 700 करोड़, आईटी विकास के लिए 300 करोड़, मनोरंजन क्षेत्र में 250 करोड़ रुपये और बायोगैस क्षेत्र में 100 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल कोष बनाने की मांग रखी।ड्ढr ड्ढr दूसरी ओर बिहार चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष ओ.पी.साह ने बिहार को उत्तरांचल, हिमाचल प्रदेश और पूवरेत्तर राज्यों की तर्ज पर भी विशेष राज्य का दर्जा देने, स्टील कारखाना लगाने, संसाधन-राजस्व अंतर की भरपाई के लिए सालाना 30 प्रतिशत अनुदान, बीमार व बन्द औद्योगिक इकाइयों को फिर से चालू करने के लिए लागत का 50 प्रतिशत अनुदान और बीएसएफसी व बिसिको जैसी सरकारी वित्तीय संस्थाओं को विशेष मदद देने की आवश्यकता जतायी। इस दौरान चैम्बर के आगामी अध्यक्ष पी.के.अग्रवाल, उपाध्यक्ष संजीव चौधरी, भारतीय औद्योगिक परिसंघ के बिहार चैप्टर के अध्यक्ष सत्यजीत कुमार, बीआईए के उपाध्यक्ष एस.एन.अशरफ, सुनील कुमार सिंह, रामलाल खेतान और एस.के.पटवारी भी मौजूद थे।

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