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मीडिया के लिए मक्का बनी क्राइम ब्रांच

मुंबई पुलिस मुख्यालय का क्राइम ब्रांच इन दिनों मीडिया के लिए मक्का से कम नहीं है। मीडिया वाले सुबह से ही यहां डेरा डाले रहते हैं। इलेक्ट्रानिक चैनलों और फोटोग्राफरों की दूरदृष्टि पाकिस्तान के रहने वाले फिदायीन आतंकी अजमल आमिर कसाब पर रहती है। कसाब का चेहरा अब अनजाना नहीं है। बावजूद इसके मीडिया वाले 26 नवंबर के बाद के कसाब को कैमर में कैद करना चाहते हैं जो शायद साबुन से धुल जाने के बाद खूंखार नहीं दिखता हो। इसके अलावा मीडिया की दिलचस्पी कसाब में और भी इसलिए है कि उसने जांच अधिकारियों को नया क्या बताया है। इस कसाब ने पुलिस मुख्यालय के परिसर में स्थित कैंटीन की बिक्री भी कई गुना बढ़ा दी है क्योंकि आम तौर पर रोाना यहां आठ से दस मीडिया वाले आते थे।ड्ढr ड्ढr अब न सिर्फ मुंबई की बल्कि विदेशी मीडिया भी कसाब की ब्रेकिंग न्यूज के लिए युद्धस्तर पर डय़ूटी कर रहे हैं। कसाब इकलौता सबूत है जिससे पाकिस्तान भी बौखलाया हुआ है। लेकिन मुंबई पुलिस के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती है कि कसाब को किस तरह से सुरक्षित औरजिंदा रखा जाए। कसाब फिदायीन है और वह अपने आकाओं को बचाने के लिए आत्महत्या भी कर सकता है। इसी डर की वजह है कि क्राइम ब्रांच ने उसे जहां पर रखा है वहां सीसीटीवी कैमर लगाए गए हैं और पुलिस की नींद हराम वाली डय़ूटी लगी हुई है। बेड़ियो में जकड़े कसाब के हिलने-डुलने से भी पुलिस की बेचैनी बढ़ जाती है। उसके खान-पान की विशेष व्यवस्था के लिए जेजे अस्पताल के डाक्टरों की एक टीम लगी हुई है। क्राइम ब्रांच के मुखिया संयुक्त पुलिस आयुक्त राकेश मारिया भी मीडिया के लिए महानायक अमिताभ बच्चन और अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से ज्यादा आकर्षण का केंद्र बन गए हैं।

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