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जरा सोचिए, गर वक्त ठहर जाए तो..

आम तौर पर कहा यह जाता है कि समय न तो रुक सकता है और न ही किसी का इंतजार करता है, जिसने भी समय की गति के साथ चलना नहीं सीखा वक्त उसे कहीं न कहीं गुमनामी की दरिया में डाल देता है। लेकिन आप मानें या न मानें इस साल वक्त ही ठहर जाएगा तो आप क्या करेंगे! नववर्ष के आगमन पर दुनिया भर की घड़ियां एक सेकेंड के लिए बंद कर दी जाएगी, मानो इतनी देर तक वक्त ठहर जाएगा। लीप ईयर की तर्ज पर इसे लीप सेकेंड़ का नाम दिया गया है। पृथ्वी के परिभ्रमण की रफ्तार में कमी आने के कारण समय में सटीक समायोजन करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। शून्य डिग्री देशान्तर पर स्थित इंग्लैंड के ग्रीनविच से पश्चिम के देशों में यह लीप सेकेंड 31 दिसम्बर 2008 को जोड़ा जाएगा जबकि भारत सहित पूर्व के देशों में तब नए साल का पहला दिन शुरु हो चुका होगा। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के गणित के विभागाध्यक्ष डॉ चन्द्र कान्त गोयल ने बताया कि लीप सेकेंड का समायोजित करने का उद्देश्य धरती की परिक्रमा पर आधारित सौर समय और परमाणु कड़ी पर आधारित समकक्ष विश्वव्यापी समय ग्रीन विच मानक समय और जी एम टी को एक समान करना है। डा0 गोयल ने बताया कि यू टी सी समयानुसार 31 दिसम्बर 2008 को रात्रि 11 बजकर 5मिनट 5सेकेंड पर लीप सेकेंड समायोजित किया जाएगा अर्थात तमाम घडियों को एक सेकेंड के लिए बंद करके पीछे कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि उस समय भारत में नए साल का पहला दिन शुरु हो चुका होगा और एक जनवरी 200प्रात: 5 बजकर 2मिनट 5सेकेंड का समय होगा। डा0 गोयल ने बताया कि सूर्य और चन्द्रमा द्वारा अपनी आेर आकर्षित करने के कारण पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने की चाल कम होने से दिन बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि चाल धरती के आवरण एवं केन्द्र के बीच जटिल युग्मन के कारण घटती-बढ़ती रहती है। डा0 गोयल ने बताया कि पृथ्वी की चाल कम होती जा रही है और एक दिन में 0.002 सेकेंड का अंतर आ जाता है। अर्थात 500 दिनों में करीब एक सेकेंड। उन्होंने बताया कि परमाणु घड़ी एक समान चाल से चलती हैं, इसीलिए जब भी दोनों में 0.6 सेकेंड का अन्तर आ जाता है तो एक लीप सेकेंड समायोजित कर दिया जाता है। डा.गोयल ने बताया कि पूर्ण समय में से एक सेकेंड कम करने को ऋणात्मक तथा जोड़ने को धनात्मक लीप सेकेंड कहा जाता है जो जून अथवा दिसंबर के अंत मे समायोजित किया जाता है। उन्होंने बताया कि अभी तक कभी भी ऋणात्मक लीप सेकेंड प्रयोग में नहीं आया है और न ही भविष्य में इसकी कोई संभावना है। इंटरनेशल अर्थ रोटेशन एण्ड रैफरेन्स सिस्टम सर्विस (आईईआरएस) द्वारा हाल ही जारी बुलेटिन सी 36 की चर्चा करते हुए डा. गोयल ने बताया कि संस्था द्वारा 31 दिसंबर 2008 को एक लीप सेकंड जोड़ने की घोषणा की गई है। उन्होने बताया कि वर्ष 1से अब तक कुल 24 लीप सेकंड जोड़कर समय को सही करने की प्रक्रिया की गई है और अब से पूर्व 2005 में लीप सेकंड जोड़ा गया था। डा. गोयल ने बताया कि वर्ष 1से 2004 तक अस्थाई रूप से पृथ्वी की चाल में अल्प त्वरण आ जाने के कारण कोई लीप सेकंड समायोजित नहीं करना पड़ा। उनका कहना है कि कई शताब्दियों बाद सौर समय और परमाणु घड़ी के समय में मिनट और घंटों का अंतर आएगा और लीप घंटा भी जोड़ने की स्थिति आ सकती है जिससे दिन रात और घड़ी के अंतर को समाप्त किया जा सके।

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