अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

राजरंग

भइया फंस गये फेरा में ..अपने एगो भइया हैं, मंत्री भइया। बेचार फेरा में फंस गये हैं। हैं तो सरकार के मंत्री, लेकिन पावरवे सीज हो गया, एसा लग रहा है। दोस्त को चुनाव मैदान में उतारना गरगट हो गया है। दोस्त मैदान से बाहर नय आना चाहता और लोग उसको हटाने के लिए प्रेशर दिये हुए हैं। हटावें तो दोस्त नाराज, न हटावें तो मुखिया जी। इधर कुआं, तो उधर खाई। आखिर करं तो का करं? इ डेमोक्रेसी है कि हिप्पोक्रेसी, पते नय चल रहा है। अर भाई, डेमोक्रेसी में सबको चुनाव लड़ने का अधिकार है। कोई भी, कहीं से चुनाव लड़ सकता है। हारना-ाीतना तो पब्लिक के हाथ में है। लेकिन इ कैसा डेमोक्रेसी है, जो किसी के फंडामेंटल राइट को मार दे। मंत्री भइया सरकार में हैं, ज्यादा बोल नहीं सकते। मन तो अकबका रहा है। भइया की अपनी अलग पार्टी है। पार्टी कैंडिडेट तो हटा देंगे, लेकिन इंडिपेंडेंट को उ का कर सकते हैं। मंत्री गांव-देहात के विकास का काम देखते हैं। इसलिए जानते हैं कि गांव-गांव में किसका केतना प्रभाव है। अब उनका दोस्त चुनाव छेतर में बहुते दिन से लगल है। काम कर रहा है। आखिर चुनाव लड़ने के लिए न इ सब कर रहा है। उसको चुनावे लड़ने नय दीजियेगा, तो उ का करगा बेचरंगा। भइया फंस गया है। न ओकते बन रहा है, न बोकते। देखिये आगे-आगे का होता है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: राजरंग