DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

भारत पर भी दिखने लगा मंदी का असर

अमेरिका, यूरोप और दुनिया के दूसरे देशों में शुरु हुआ आर्थिक संकट का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर अक्टूबर तक साफ दिखाई देने लगा है। देश के निर्यात कारोबार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक और अप्रत्यक्ष कर वसूली विशेषकर उत्पाद शुल्क वसूली में अक्टूबर आते आते गिरावट का रूख बन गया है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के दूसरी तिमाही के आंकडे भी पहली तिमाही के मुकाबले कम रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि बाहर की मंदी अब भारतीय अर्थव्यवस्था को भी अपने आगोश में लेने लगी है। अक्टूबर 2008 में देश का निर्यात कारोबार पिछले साल अक्टूबर की तुलना में 12.1 प्रतिशत घट गया। अक्टूबर महीने में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में भी 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अक्टूबर में उत्पाद शुल्क वसूली पिछले साल की तुलना में 8.7 प्रतिशत घट गई और जुलाई से सितंबर की दूसरी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर इससे पहले तिमाही में हासिल 7.प्रतिशत के मुकाबले कुछ कम रहकर 7.6 प्रतिशत पर आ गई। सरकार ने भी मंदी की आहट महसूस करते हुए अपने स्तर पर प्रयास तेज कर दिए हैं। रिजर्व बैंक ने जहां ब्याज दरों को नीचे लाने के लिए उपाय किए हैं, वहीं सरकार ने मांग बढ़ाने के लिए उद्योगों को उत्पाद शुल्क में राहत दी है। बहरहाल उद्योग जगत ने इसे नाकाफी बताते हुए सरकार से एक और पैकेज की मांग की है। वित्तमंत्री के तौर पर पी चिदंबरम(अब गृहमंत्री) ने कुछ दिन पहले ही विश्व आर्थिक मंच के सम्मेलन में देश में मंदी मानने से इंकार किया था। उनका कहना था कि लगातार दो तिमाहियों में जब वृद्धि दर नकारात्मक हो तभी किसी अर्थव्यवस्था में मंदी मानी जाती है। बहरहाल भारतीय अर्थव्यवस्था में ऐसे कोई संकेत नहीं हैं। रिजर्व बैंक ने इस साल अप्रैल में जब वार्षिक ऋण एवं मौद्रिक नीति जारी की थी तो 2008-0में 8 से 8.5 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का अनुमान लगाया था। जुलाई में हुई पहली तिमाही समीक्षा में इसे घटाकर आठ प्रतिशत और अक्टूबर में जारी छमाही समीक्षा में इसे और घटाकर आठ से 7.5 प्रतिशत कर दिया गया। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने जुलाई में आर्थिक परिवेश पर जारी रिपोर्ट में इस साल 7.7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है, लेकिन वित्तमंत्री ने हाल ही में कहा कि इस साल 7 से आठ प्रतिशत के बीच वृद्धि रहेगी। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया ने उद्योगों के लिए सरकार का आर्थिक पैकेज जारी करते समय कहा था कि इस साल यदि 7 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि भी रहती है तो यह घरेलू अर्थव्यवस्था का बेहतर प्रदर्शन होगा। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन(संप्रग) सरकार के पिछले चार सालों में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी)की वृद्धि दर पहले साल 7.5 प्रतिशत, दूसरे साल प्रतिशत, तीसरे साल प्रतिशत और चौथे साल 2007-08 में प्रतिशत के उच्च स्तर पर रही है, लेकिन इस साल दुनिया भर के देशों में हुए आर्थिक संकट के असर से इसके 7 से 7.5 प्रतिशत के बीच रहने के आसार लग रहे हैं। देश की जीडीपी वृद्धि दर बढ़ने की रफ्तार बेशक धीमी पड़ती नजर आ रही हो, लेकिन अक्टूबर में निर्यात में आई 12.1 प्रतिशत की भारी गिरावट औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में आई 0.4 प्रतिशत की गिरावट और अक्टूबर में उत्पाद शुल्क वसूली में आई 8.7 प्रतिशत की गिरावट कान खड़े कर देने वाले हैं। यह गिरावट वृद्धि दर की गिरावट नहीं, बल्कि सीधे मंदी की तरफ इशारा करती है। देश का निर्यात कारोबार पिछले साल अक्टूबर में 1458 करोड डॉलर का हुआ था, लेकिन इस साल अक्टूर में यह 12.1 प्रतिशत घटकर 1282 करोड डॉलर रह गया। हालांकि अप्रैल से अक्टूबर तक के सात महीनों में कुल मिलाकर अभी भी निर्यात में 10.6 प्रतिशत की बढ़त है। लेकिन आने वाले महीनों में भी यदि गिरावट का रुख बना रहा तो यह वृद्धि भी जाती रहेगी। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक पिछले साल अक्टूबर में 262.5 अंक पर था। इस साल यह 0.4 प्रतिशत घटकर 261.5 अंक रह गया। एक महीना पहले सितंबर में इसमें 5.45 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। पिछले साल अक्टूबर में यह 12.2 प्रतिशत बढ़ा था, लेकिन इस साल अक्टूबर में करीब आधा प्रतिशत घट गया। औद्योगिक गतिविधियां कमजोर पड़ने का अर्थ है-आर्थिक गतिविधियां सुस्त पडना, रोजगार में कटौती और नए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना धूमिल पड़ना। औद्योगिक उत्पादन घटने का असर उत्पाद शुल्क वसूली पर भी दिखाई दिया और अक्टूबर महीने में उत्पाद शुल्क वसूली पिछले साल के 102रोड रुपये से घटकर इस साल रोड रुपये रह गई। सीमा शुल्क वसूली में भी करीब एक प्रतिशत की गिरावट रही कुल मिलाकर अक्टूबर में उत्पाद एवं सीमा शुल्क वसूली पिछले साल अक्टूबर के मुकाबले 5 प्रतिशत कम रही। हालांकि वित्त वर्ष के सात महीनों में कुल मिलाकर इसमें 7.5 प्रतिशत की वृद्धि बनी हुई है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: भारत पर भी दिखने लगा मंदी का असर