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ऊचरा स्रेतों का संरक्षण जरूरी

राष्ट्रीय ऊरा संरक्षण दिवस पर मुख्य अतिथि सीएमपीडीआइ निदेशक तकनीकी एएन सहाय ने कहा कि ऊरा के सतत् उपयोग के लिए स्रेतों को बचाने का उपाय करना होगा। प्रमुख स्रेत कोयला खत्म हो जायेगा, तो बिजली कहां से आयेगी। इसलिए वैकल्पिक स्रेतों से ऊरा का उत्पादन होना चाहिए। सहाय डोरंडा में द इंस्टीट्यूशन ऑफ इांीनियर्स झारखंड इकाई द्वारा आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।ड्ढr उन्होंने कहा कि सबसे अच्छा साधन सौर और पवन है। इससे ऊरा पैदा की जा सकती है, जो सस्ती भी है। समारोह में पीसीआरए के उप निदेशक एसके सिन्हा ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों के इस्तेमाल पर भी नियंत्रण होना चाहिए। यह गैर पारंपरिक ऊरा स्रेत है। इसका पुन: निर्माण नहीं हो सकता। इसलिए सोलर, हवा और जल के स्रेतों से ऊरा का उत्पादन होना चाहिए। मेकन के एजीएम डॉ पीके मांझी ने कहा कि देश में कुल 143061 एमवी ऊरा का उत्पादन होता है। इसमें 64 प्रतिशत थर्मल पावर का योगदान है। उद्योगों में बिजली की खपत अधिक है। इसे बचाना आवश्यक है। इससे पूर्व अतिथियों ने दीप प्रजवलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। एके सक्सेना ने सभी का स्वागत किया। अतिथियों को स्मृति चिह्न् दिया गया। एक क्िवज प्रतियोगिता हुई। इसके प्रतिभागियों को संजय कुमार ने पुरस्कृ त किया।ड्ढr निबंध प्रतियोगिताड्ढr रांची। केंद्रीय और राज्य ऊरा मंत्रालय के संयुक्त तत्वाधान में ऊरा कार्य कुशलता ब्यूरो द्वारा होटल रांची अशोक में निबंध-स्लोगन लेखन प्रतियोगिता हुई। इसमें 4ूली बच्चे शामिल हुए। इसके पहले राज्य के 316 स्कूलों में प्रतियोगिता आयोजित की गयी थी। इसमें 623 प्रतिभागी ने हिस्सा लिया, जिनमें से 51 चुने गये थे।

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