DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आतंकी संगठनों का ढांचा तोड़ने पर फोकस करे

मुंबई हमले में गिरफ्तार आतंकी अजमल कसाब के पाकिस्तानी नागरिक होने की बात करीब-करीब पाकिस्तान सरकार ने मान ली है। इस हमले के बाद से भारत ने पाक प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ जो वैश्विक मुहिम छेड़ी थी, उस सिलसिले में यह भारत के लिए महत्वपूर्ण सफलता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अब भारत को वैश्विक समुदाय और यूएन सुरक्षा परिषद के जरिये पूरा जोर इस बात पर देना चाहिए कि पाकिस्तान अपनी जमीन पर सक्रिय आतंकी संगठनों के ढांचे को ध्वस्त कर। मेजर जनरल (रिटायर्ड) अफसीर करीम ने कहा कि पाक की इस स्वीकारोक्ित के बाद उसकी तरफ से पहली प्रतिक्रिया यह होगी कि वह कसाब को सौंपे जाने की मांग कर सकता है। अन्तरराष्ट्रीय कानूनों के तहत ऐसा होता है। लेकिन इसमें दो पेंच हैं। एक पाकिस्तान के साथ प्रत्यपर्ण संधि नहीं है। दूसर कसाब ने अपराध भारत में किया है, इसलिए भारत उसे सौंपने से इनकार कर सकता है। इसलिए कसाब को सौंपे जाने की संभावना कम है और मामला कानूनी पचड़े में फंस सकता है। बहरहाल, कसाब को भारत में सजा मिले यह जुदा मसला है क्योंकि एक आतंकी को सजा देने भर से भारत की समस्या हल होने वाली नहीं है। भारत का फायदा तब है जबकि पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों की जड़ें उखड़ें। जड़ें उखाड़ने के लिए भारत के पास इससे बेहतर मौका नहीं हो सकता। करीम के अनुसार लश्कर और दावा जैसे भारत विरोधी संगठनों को गाहे-बगाहे वहां की जनता की सहानुभूति प्राप्त है, सरकार का उन पर नियंत्रण भी नहीं है और ऐसी मंशा भी नहीं। बल्कि आईएसआई जैसी एजेंसियां उन्हें पनाह दे रही हैं। इसलिए भारत का अगला कदम वैश्विक समुदाय के जरिये पाक पर बने मौजूदा दबाव को कायम रखना है। साथ ही उसे इस बात के लिए बाध्य करना होगा कि लश्कर, दावा जैसे संगठनों को सिर्फ प्रतिबंधित कर देने से काम नहीं चलेगा। यदि इस दबाव के चलते पाकिस्तान ऐसे संगठनों के प्रति अपनी नीति में बदलाव करता है तो यह भारत के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। वैसे, पाक कि इस स्वीकारोक्ित का एक तात्कालिक फायदा यह भी है कि कुछ समय तक तो भारत में ऐसी वारदात आतंकी नहीं कर पाएंगे। रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकी हमले की जांच में सहयोग को तैयार नहीं होता तब तक कुछ नहीं होने वाला। यूएन से हमें ज्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए क्योंकि यूएन के कहने पर इस स्वीकारोक्ित से पहले ही पाक ने आतंकी संगठनों को प्रतिबंधित कर दिया था। और फिर ऐसा कोई पहली बार नहीं हुआ है। इसलिए भारत को कूटनीति के साथ-साथ पाक के खिलाफ कुछ कड़े कदम भी उठाने में हिचक नहीं करनी चाहिए।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: आतंकी ढांचे को तोड़ने पर फोकस करे भारत