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..जब डीचाीपी ने खोली पुलिसिया कार्यशैली की पोल

या पुलिस अधिकारी के घर की कोई महिला शिकायत लेकर थाने में जा सकती है? पुलिस की चुनौतियों को लेकर आयोजित कार्यशाला के समापन में सूबे के पुलिस महानिदेशक डी.एन. गौतम ने अपने अधिकारियों से यह सवाल कर बिहार पुलिस की कार्यशैली की कलई खोल दी। उन्होंने कहा कि यही बिहार की पुलिस के लिए परीक्षा है। जिस दिन किसी संभ्रान्त घर की कोई महिला बेहिचक थाने में अपनी शिकायत लेकर जाने लगेगी उसी दिन माना जाएगा कि पुलिस की इमेज बदल गई है। श्री गौतम ने कहा कि इस स्थिति को बदलने का संकल्प हमें लेना है। थाने में कोई आम आदमी आए तो उसकी एफआईआर दर्ज हो। अगर एफआईआर के लायक मामला न भी हो तो कम से कम उसकी शिकायत सुनी जाए। अभी तो थाने में लोग सीधे मुंह बात भी नहीं करते हैं। उन्हें पता ही नहीं कि आम आदमी को उनसे सवाल पूछने का हक है। उन्होंने याद दिलाया कि पुलिस और जनता दोनों एक ही नाव पर सवार हैं। आतंक का जंग दोनों के सहयोग से ही जीता जा सकता है। उन्होंने कहा- दो कदम हम ना चले, दो कदम तुम ना चले। जिन्दगी के फासले इस कदर बढ़ते रहे। डीाीपी ने कहा कि पुलिस का शिष्टाचार गोली चलाने में भी दिखना चाहिए। पुलिस का हर जवान अपराधियों की पहली गोली झेलने के लिए तैयार रहे। लेकिन गोली चलाने में भी शिष्टाचार होना चाहिए। यह तभी होगा जब दुश्मन की गोली को अपने सीने पर झेलने के पहले वह दुश्मन के खेमे तक अपनी गोली पहुंचा दे। उन्होंने कहा कि पुलिस से ज्यादा त्याग और बलिदान कोई नहींकरता है। पुलिस के लोग कभी भी कोई त्योहार अपने परिवार के साथ नहीं मनाते। कोसी की बाढ़ में उसइलाके का हर पुलिसकर्मी चार फीट पानी में खड़ा रहा। लेकिन उसके त्याग और बलिदान की कभी नोटिस नहीं ली जाती।

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