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टिफिन की घंटी बजते ही हो जाती है छुट्टी

टिफिन की घंटी बजते ही हो है जाती छुट्टी। कुछ बच्चे घर चले जाते है तो कुछ खेल के मैदान में। जिले के लगभग पचास फीसदी हाई स्कूलों में यह परिपाटी तेजी से पनपी है। अधिकारियों की टीम ने कुछ स्कूलों का निरीक्षण कर जो तथ्य जुटाया है वह जनशिकायतों के काफी नजदीक है। डीईओ भी इस सच्चाई को स्वीकारते हैं।ड्ढr ड्ढr उल्लेखनीय है, जिले में हाई स्कूल, 03 अल्पसंख्यक हाई स्कूल व 11 संस्कृत उच्च विद्यालय है जिसमें लगभग बीस हाार बच्चे नामांकित हैं लेकिन इनमें से आधे की पढ़ाई राम भरोसे है। अहियापुर निवासी अभिभावक गजेन्द्र राय ने बताया कि ‘स्कूलों में पढ़ाई ठीक नहीं होने के कारण बच्चों के लिए टय़ूशन मजबूरी हो गयी है।’ उधर, भटौना हाई स्कूल में डीईओ विनोद कुमार राम, एसडीओ एजुकेशन मदन राय, सहायक कुमार रवि की टीम शुक्रवार को दिन 2.20 बजे पहुंची तो मात्र उन्हें मात्र दो शिक्षक मिले। अन्य शिक्षक और बच्चों का अता-पता नहीं था। प्रोजेक्ट हाई स्कूल कुढ़नी में तो मात्र एक चपरासी का दर्शन हुआ। डीईओ ने बताया कि कर्तव्य के प्रति उदासीनता बरतने वाले शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। नियमविरूद्ध अनुपस्थिति पर वेतन रोका जायेगा। बकौल डीईओ , फिफ्टी परसेंट स्कूलों में टिफीन के बाद कक्षाएं नहीं लग रही है। सुधार के लिए निरीक्षण दल बनाये जा रहे हैं। विभाग का आकलन है कि पूर्वी अनुमंडल के मुशहरी, बोचहा, गायघाट आदि प्रखंडों में स्थित हाई स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था कुछ ज्यादा ही लचर है।

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