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नोट फॉर वोट कांड में अमर-पटेल को क्लीन चिट

मनमोहन सरकार के लोकसभा में विश्वासमत को लेकर नोट के बदले वोट प्रकरण की जांच करने वाली लोकसभा की समिति ने समाजवादी पार्टी (सपा) के महासचिव अमर सिंह और कांग्रेस के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल को क्लीन चिट दी है। समिति के अध्यक्ष किशोर चंद देव ने सोमवार को लोकसभा में 466 पृष्ठ की रिपोर्ट पेश की जिसमें इन दोनों नेताआें को क्लीन चिट दी गई है लेकिन अमर सिंह के सहयोगी संजीव सक्सेना की इस मामले में भूमिका की जांच किसी जांच एजेंसी से कराने की सिफारिश की है। समिति ने कहा है कि पटेल के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया तथा अमर सिंह के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। इसलिए उसके या सदन के लिए कोई कारण नहीं बनता कि रायसभा के इन दोनों सदस्यों को समिति के समक्ष साक्ष्य देने के लिए बुलाया जाए। इन दो सदस्यों के विरुद्ध इस मामले को रायसभा को परीक्षण, जांच और प्रतिवेदन के लिय भेजने का कोई कारण नहीं है। समिति ने इस बात पर क्षोभ व्यक्त किया है कि रिकार्ड में उपलब्ध सामग्री से कहीं से भी यह साबित नहीं होता है कि सदन में विश्वास मत पर चर्चा के दौरान दिखाए गए नोटों से भरे बैग अमर सिंह ने भाजपा के तीन सांसदों को विश्वास मत प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने के लिए भेजे थे। उल्लेखनीय है कि गत 22 जुलाई को लोकसभा में मनमोहन सिंह सरकार के विश्वास मत पर चर्चा के दौरान भाजपा सदस्यों अशोक अर्गल, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा ने एक करोड़ रुपए के नोटों के बंडल सदन में लहराते हुए आरोप लगाया था कि सरकार के पक्ष में मतदान करने के लिए यह रिश्वत दी गई। उन्होंने पटेल और अमर सिंह के नाम लिए थे। लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने पूरे मामले की जांच के लिए किशोर चंद देव की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति ने समाजवादी पार्टी (सपा) नेता रेवतीरमण सिंह को भी बरी करते हुए कहा कि वह निसंदेह धनराशि के लेनदेन में शामिल नहीं थे। उनकी भूमिका भाजपा सदस्यों को अमर सिंह से मिलने के लिए मनाने तक ही सीमित प्रतीत होती है। हालांकि समिति ने अर्गल को सपा में शामिल करने के रेवती रमण सिंह द्वारा धनराशि संबंधी बातचीत पर अप्रसन्नता जाहिर की है। उसने कहा है कि उन जैसी प्रतिष्ठा और पद मर्यादा रखने वाले नरेन्द्र को इस तरह के छलकपट में शामिल नहीं होना चाहिए। समिति ने इस मामले में संजीव सक्सेना की भूमिका की किसी जांच एजेंसी से जांच कराने की आवश्यकता पर बल दिया। उसने कहा है कि संजीव सक्सेना के साक्ष्य में कई कमियां और खामियां हैं। उसने खुद स्वीकार किया है कि अर्गल के निवास पर तीनों भाजपा सदस्यों को नोट दिए थे। समिति ने इसे संसदीय आचरण को प्रभावित करने के लिए रिश्वत देना बताया है लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उसने किसके इशारे पर यह काम किया।

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