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उर्दू मीडिया : चुनावी दौर में स्वाइन फ्लू

‘स्वाइन फ्लू की बढ़ती दहशत और उसके कारणों’ पर चर्चा करते हुए दैनिक हमारा समाज ने लिखा है कि जिस तेजी से यह दुनिया में बढ़ रहा है, उसको देखते हुए डब्ल्यूएचओ ने पांचवें स्तर की चेतावनी जारी कर विश्व समुदाय को विचार-विमर्श पर मजबूर कर दिया है क्योंकि एक स्तर और बढ़ने का मतलब है कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर की महामारी का रूप करार पाएगी। भारत में आमतौर पर जो सूअर पाले जाते हैं वह पूरी तरह से गंदगी में लिप्त रहते हैं। फिर इस जानवर को कुछ लोग मार कर खाते हैं। निश्चय ही गंदगी में पलने वाले जानवर का गोश्त कितना नुकसानदेह होगा इसका सहा अनुमान लगाया जा सकता है। यही कारण है कि इस्लाम में इस जानवर को नापाक बताया गया है और इसका खाना हराम करार दिया गया है। इस जानवर को सिर्फ गंदगी दूर करने का माध्यम समझना ही प्रकृति का तकाजा है। इसके खाने का मतलब बीमार होना, तरह-तरह के मर्ज में लिप्त होना और फिर इसका महामारी की शक्ल अख्तियार करना अप्रत्याशित नहीं है। ‘क्वात्रोकी को दफ्न करने की कोशिश’ के शीर्षक से दैनिक ‘सियासत’ ने लिखा कि अंतत: कांग्रेस ने अपने शासन का फायदा उठा ही लिया। करोड़ों रुपए के घोटाले वाले बोफोर्स मामले के आखिरी आरोपी को भी इंटरपोल की सूची से निकाल कर बरसों से पीछा करने वाले केस से छुटकारा हासिल करने की कोशिश की गई है। बोफोर्स अदायगी केस में इटली के व्यवसायी ओतावियो क्वात्रोकी जिंदा बचे आरोपियों में अकेले हैं। 1से मुकदमा चल रहा है और 30 अप्रैल 200ो भी इसकी सुनवाई की तारीख थी लेकिन अचानक केस को विशेषकर ऐसे केस को जिसने देश के रक्षा मामलों के साथ सौदा किया या मजाक किया गया था, इस केस के महत्वपूर्ण आरोपी को सूची से हटा देना कई तरह की शंकाओं और विवादों को जन्म देता है। क्वात्रोकी जिस देश से संबंध रखते हैं, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की जन्मस्थली भी वही देश है। न्याय के तकाजों का गला घोंटने में कांग्रेस अपना कोई जवाब नहीं रखती लेकिन देश में अभी इंसाफ पसंद जमाअतों का वजूद बाकी है। ‘राष्ट्रीय सहारा’ ने ‘क्वात्रोकी पर गैर जरूरी हंगामा’ के तहत सियासत द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन किया है। दैनिक ‘मुनसिफ’ ने ‘बोफोर्स और क्वात्रोकी’ के अपने सम्पादकीय में लिखा है कि भाजपा अगुवाई वाली राजग की सरकार बनी थी तो अपने शासन काल में इस बात का पूरा मौका था कि वह बोफोर्स मामले को एक बड़ा घोटाला साबित करके आरोपियों को अपराधी बनाती लेकिन वह इस मामले में नाकाम रही। सीबीआई का इस्तेमाल सभी सरकारं अपने हित में करती आई हैं स्वयं आडवाणी ने गृहमंत्री और उपप्रधानमंत्री रहते सीबीआई से अपना नाम बाबरी मसिद गिराने के मुकदमें में षडयंत्र करने वाले आरोपियों की सूची से निकलवाया था और आज आडवाणी इन्तेहाई बेशर्मी से सीबीआई की आलोचना कर रहे हैं। ‘परदेश में हिन्दुस्तानी का काला धन’ के अपने लेख में ख्याति प्राप्त अर्थशास्त्री सईद सोहरवरदी लिखते हैं कि भाजपा ने परदेश से हिन्दुस्तानी काले धन की वापसी की बात करके जनता को गुमराह करने की कोशिश की है। यह मसला टैक्स की चोरी के अलावा घूस और सरकारी सौदों में कमीशन की वसूली से जुड़ा है। भाजपा की दिलचस्पी केवल इतनी है कि सोनिया गांधी को कटघर में खड़ा किया जा सके। लेकिन यह मसला सोनिया गांधी, उनके परिवार और उनकी राजनीति तक सीमित नहीं रखा जा सकता। ग्रुप 20 में शामिल बड़े आर्थिक देशों ने अपनी बैठक में ‘टैक्स चोरों के छिपने की जगह’ के खिलाफ ठोस कार्यवाही की धमकी दी है। उनका ख्याल है कि गैर कानूनी तौर पर हासिल करके जमा किया हुआ रुपया विश्व अर्थव्यवस्था के लिए ‘खतरनाक’ है इनको बाजार को ऊपर चढ़ाने अथवा नीचे गिराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अब हालात ऐसे हैं कि यह मामला चुनावी मुहिम के साथ ठंडा नहीं होगा बल्कि 15वीं लोकसभा में इसकी गूंज सुनाई देगी। रांची, पटना और दिल्ली से प्रकाशित होने वाले ‘फारुकी तंजीम’ में ‘झूठ का पुलिंदा है भारतीय लोकतंत्र’ में लिखा है कि राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति की कुर्सी पर किसी मुसलमान को बैठाकर भारत को सेकुलर साबित करने की कोशिश की जाती है। आजादी के बाद से इस देश में मुसलमानों के बच्चों को चायखानों, वर्कशापों ओर गैराजों आदि में काम करने वाल बनाकर रख दिया गया है। हम कट्टरपंथी नहीं हैं लेकिन देश की कट्टरपंथी मानसिकता ओर लोकतंत्र के नाम पर मुसलमानों को तबाह व बर्बाद करने की छुपी नहीं खुली साजिश बहुत साफ देख रहे हैं। हम भाजपा की तारीफ करंगे कि खुलेआम मुस्लिम दुश्मन है बाकी छुपी हुई मुस्लिम दुश्मन हैं। लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।

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