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दिल्ली के ढाबे सील क्यों?

दर गिरी, महंगाई नहीं सरकारी आंकड़े कहते हैं कि महंगाई दर गिर गई, लेकिन दुकानों की रट लिस्ट इस दावे को झुठला रही है। दूध, घी, सब्जी आदि के दाम आज भी वही हैं, जो उच्चतम महंगाई दर के दौर में थे। सरकारी आंकड़ों से आम आदमी के फायदा नहीं। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दाम घटने के बावजूद सरकार तेल के दाम घटाने में कांूसी कर रही है तो प्राइवेट इंडस्ट्री से किसी रियायत की उम्मीद कैसे की जा सकती है। आंकड़ेबाजी से निकलकर सरकार को आम आदमी की जेब का भी ख्याल करना चाहिए। जयभगवान शर्मा, मोहाली फिक्र कुर्सी की सलामती का मुंबई में आतंकी हमलों के बाद हमार मंत्रियों और नेताओं की बयानबाजी से ऐसा लगता है कि इनके दिलों में देश के लिए मर मिटने वाले शहीदों के लिए कोई सम्मान नहीं है। इन्हें फिक्र है तो सिर्फ और सिर्फ अपनी कुर्सी की सलामती का। आखिर हमारा लोकतंत्र ऐसे नेताओं को कब तक ढोता रहेगा। विजय लोढ़ा, रायपुर, छत्तीसगढ़ खिलाड़ियों के जज्बे को सलाम भारत और इंग्लैंड के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीा शुरू हो गई। मुंबई पर आतंकी हमले के बाद किसी अंतरराष्ट्रीय टीम का यह पहला भारत दौरा है। ऐसे तनाव भर माहौल में खेलना दोनों ही टीमों के लिए आसान नहीं है, लेकिन दाद देनी होगी खिलाड़ियों के हौसले की। खासकर इंग्लैंड की कि वह मुंबई पर आतंकी हमले के बाद भी भारत आई और पूर उत्साह के साथ खेल के मैदान में उतरी। सलिल आहूाा, सेक्टर-71, मोहाली बाजार का विकल्प दे सरकार सरकार लोगों को कृषि के लिए प्रोत्साहित कर रही है, लेकिन पर्वतीय कृषक अधिक पैदावार करके भी क्या करगा जब उसे उसके दाम नहीं मिलने वाले। चमोली में माल्टा, टिहरी में अदरक और अल्मोड़ा में आडू़ हो रहा है, मगर मार्केट नहीं है तो किसान ज्यादा क्यों उगाएगा। इसलिए सरकार जब कृषि उपज बढ़ाने की बात करती है तो उसे सबसे पहले बाजार का विकल्प उपलब्ध कराना चाहिए। सीमा गौनियाल, जड़ाऊखांद लतीफों का शहर ये जिगर, वो नजरड्ढr क्या कहनेड्ढr पहलुओं के बीचड्ढr सफर, क्या कहनेड्ढr मेर गुनाह,मुझी पे हंसते हैंड्ढr ये है लतीफों का शहरड्ढr क्या कहने। शरद जायसवाल, कटनी, म. प्र.

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