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समुद्री डाकुआें का आतंक, कंपनियां होने लगी हथियारबंद

अदन की खाड़ी में जल दस्युआें के आतंक से परेशान प्रमुख जहाजरानी एवं तेल कंपनियों ने इस समस्या से निपटने के लिए अपने कर्मचारियों को हथियारबंद बनाने और व्यावसायिक सुरक्षा एजेंसियों की सेवाएं लेने की दिशा में काम शुरु कर दिया है। भारतीय नौसेना द्वारा सोमालियाई जल दस्युआें के खिलाफ कई बार कार्रवाई किए जाने के बावजूद अपराध की दर में कोई कमी नहीं दिखाई दी। इस वर्ष अदन की खाड़ी में जल दस्युआें के सौ से भी यादा हमले हो चुके हैं जिनमें सऊदी अरब के विशालकाय तेल टैंकर (सिरियस स्टार) का अपहरण शामिल है। दुबई में आयोजित समुद्री व्यापार प्रदर्शनी में जलदस्युआें की समस्या पर सोमवार को आयोजित एक संगोष्ठी में बचाव की कई योजनाआें पर गहन चर्चा की। बैठक के पहले नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी के अध्यक्ष मोहम्मद सूरी ने कहा कि जल दस्युआें के खतरे से निपटने के लिए जहाजों पर व्यावसायिक एवं सशस्त्र सुरक्षा बल की तैनाती असरदार उपाय हो सकता है। उन्होंने बताया कि उनके पांच जहाजों का जल दस्युआें ने अपहरण किया था। उनकी कंपनी जहाजों पर अपनी सुरक्षा की तैनाती की तैयारी कर रही है। सूरी ने बताया कि उनकी कंपनी ने अदन की खाड़ी के दोनों सिरों दजिबूती और सलालह में दो सुरक्षा पोत तैनात कर दिए हैं। इन जहाजों पर सशस्त्र बल तैनात रहेंगे, जो खाड़ी से गुजरने वाले मालवाहक और तेलवाहक जहाजों को सुरक्षा प्रदान करेंगे। सऊदी अरब की राष्ट्रीय जहाजरानी कंपनी के तेल एवं गैस विभाग के प्रमुख सालेट अल शामेख ने कहा कि उनके विभाग ने जल दस्युआें के खतरे से निपटने के सभी उपलब्ध विकल्पों की पड़ताल शुरु कर दी है। शामेख ने बताया कि कंपनी के जहाजों के कप्तानों को रफ्तार तेज रखने तथा तट से दूर चलने को कहा गया है। उन्होंने भारतीय नौसेना की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना की बदौलत ही उनका एक पोत डाकुआें के हाथ पड़ने से बचा है। पश्चिम एशिया की सबसे बड़ी जहाजरानी कंपनी यूनाईटेड अरब शिपिंग कंपनी के मुख्य संचालन अधिकारी जोर्न हिंगे ने कहा कि जलदस्युआें को पकड़ने की उम्मीद कम तथा फिरौती की राशि बहुत यादा होने के साथ ही सोमालिया में पूरी तरह अराजकता के कारण जल दस्युआें की समस्या पर जल्द काबू पाना संभव नहीं है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र टैंकर मालिक संघ के प्रबंध निदेशक पीटर स्विफ्ट ने जहाजों पर शस्त्रों की तैनाती का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय एवं विभिन्न राष्ट्रीय कानूनों में जहाज में पिस्तौल लेकर चलना भी प्रतिबंधित है। कई बंदरगाहों में ऐसे जलपोत को प्रवेश करने की अनुमति तक नही दी जाती है। उन्होंने कहा कि उनका संगठन मानता है कि यदि भारत, रूस, यूरोपीय संघ एवं नाटो की नौसेनाएं एकीकृत कमान के तहत समन्वित कार्रवाई करें तो जल दस्युआें को खत्म किया जा सकता है। अदन की खाड़ी से 85000 जहाज गुजरा करते हैं। कई जहाज कंपनियां अपने जलपोतों को स्वेज नहर के मार्ग की बजाय अफ्रीका महाद्वीप का पूरा चक्कर लगा कर भेजने का भी विचार कर रही है।

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  • Web Title: समुद्री आतंक: कंपनियां होने लगी हथियारबंद