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संयुक्त राष्ट्र पहुंचा सिखों की पगड़ी का मामला

्रांस की स्कूलों में पगड़ी पहनने पर लगे प्रतिबंध का मामला अब संयुक्त राष्ट्र में पहुंच चुका है। सिखों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले एक संगठन (यूनाइटेड सिख्स) ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति से फ्रांस की स्कूलों में पगड़ी पहनने पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को तुंरत हटाने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि फ्रांस ने 2004 में एक कानून बनाकर प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में धार्मिक प्रतीक धारण करने पर रोक लगा दी थी। सिखों की पगड़ी के मामले ने तब तूल पकड़ा जब 2004 में 18 वर्षीय स्कूली छात्र बिक्रमजीत सिंह को पगड़ी उतारने से मना करने के कारण स्कूल से निकाल दिया गया था। यूनाइटेड सिख्स ने नागरिक अधिकारों के समर्थन में सोमवार को न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के समीप सम्मेलन आयोजित किया। संगठन ने कहा कि पगड़ी उतारने से मना करने के कारण ब्रिकमजीत सिंह को स्कूल से निकालकर फ्रांस ने उसके अधिकारों का हनन किया है। संगठन के वकील स्टीफन ग्रोस्ज ने बताया कि फ्रांस में बिक्रमजीत सिंह और दो अन्य के मानवाधिकार हनन के बारे में संयुक्त राष्ट्र महासभा की समिति में एक आवेदन दाखिल किया गया है। तस्वीर के लिए पगड़ी उतारने के मना करने के कारण इन लोगों की फ्रांसीसी पहचान संबंधी दस्तावेजों का नवीनीकरण नहीं किया गया था। ग्रोस्ज ने टेलीकांफ्रेंस के जरिए लंदन से कहा कि फ्रांस ने बिक्रमजीत सिंह के अधिकारों का हनन किया है। हम चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति फ्रांस पर ऐसे कानून को हटाने के लिए नैतिक दबाव बनाए। हालांकि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति गैर बाध्यकारी प्रस्ताव पारित करती है या सिफारिश करती है जिनका केवल नैतिक महत्व होता है।

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