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कैनवस पर दिखेगी कविता

सोचिए, प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानन्दन पन्त की काव्य पंक्ितयों-‘फैली खेतों में दूर तलक, मखमल की कोमल हरियाली, लिपटी जिससे रवि की किरणें, चाँदी की -सी उाली जाली’ या फिर महाकवि जयशंकर प्रसाद की ‘कामायनी’ की पंक्ितयों-‘प्राची में फैला मधुर राग, जिसके मण्डल में एक कमल खिल उठा सुनहरा भर पराग’ को कैनवस पर चित्रित किया जाय तो वह कैसा भूदृश्य होगा! उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान एक ऐसा ही अनूठा प्रयोग करने जा रहा है जिसमें राजधानी के कई युवा एवं वरिष्ठ चित्रकार भाग लेंगे। बाद में ये चित्र संस्थान की स्थायी तौर पर शोभा बनेंगे।ड्ढr संस्थान ने चित्रकारों के ‘अभिव्यक्ित’ समूह के साथ मिलकर कार्यशाला रूप में यह आयोजन करने की योजना बनाई है। चुनावों के बाद मई माह में होने वाले इस कार्यक्रम में दस चित्रकारों को शामिल किया जाएगा। इन चित्रकारों को हिन्दी के प्रसिद्ध कवियों की काव्य पंक्ितयाँ दी जाएँगी जिनको सुनकर उठने वाले विचारों, उनके अर्थो से कल्पना में आने वाले दृश्यों को कैनवस पर उतारने का प्रयास होगा। इसके लिए चित्रकारों को तीन दिन का समय दिया जाएगा।ड्ढr ऐसा प्रयोग पहली बार नहीं हो रहा है। राज्य ललित कला अकादमी ने भी कुछ वर्षो पूर्व ऐसी कार्यशाला आयोजित की थी। अकादमी ने प्रेमचन्द की कहानियों पर भी एक कार्यशाला का आयोजन किया था। प्रसिद्ध चित्रकार एम. एफ. हुसेन ने प्रसिद्ध गायक भीमसेन जोशी के गायन पर आधारित चित्र बनाया था। महादेवी वर्मा से लेकर जगदीश गुप्त तक कई कवियों को खुद भी चित्रकला से काफी प्रेम था और उनके बनाए कई रखाचित्र भी मिलते हैं। लेकिन कविता को चित्रित करना इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि कविता में कई बार बहुत कुछ अमूर्त होता है और बार बार पढ़ने पर कविता के कई अर्थ भी खुलते हैं। इस प्रयोग से उत्साहित ‘अभिव्यक्ित’ के अध्यक्ष उमेश सक्सेना कहते हैं कि यह आयोजन कविता और चित्रकला के अन्तरसम्बन्ध तलाशेगा। ं

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