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पर्यावरण रक्षा में जुटे झमनलाल

वन-पर्यावरण पर दुनिया चिंतित है। विशेषज्ञ का हवाला देते हैं। जबकि झमनलाल ऐसे पर्यावरणविद् हैं, जो महा संतों का वास्ता देकर सबको मना रहे हैं। सुखद आश्चर्य यह कि लोग ज्यादा प्रभावित हैं। इससे उलट, मुखालफत करनेवालों को झमनलाला का कोपभाजन भी बनना पड़ता है। गोला के सरलाजारा के झमनलाल महतो अब इलाके में परिचय के मोहताज नहीं। उनके नाम के आगे लोग ‘देशप्रेमी’ जरूर लगा देते हैं। झमनलाल के जीवन का एक ही लक्ष्य है, प्रदेश भर में घूम कर वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण और नशा उन्मुलन पर संतों के हवाले लोगों को जागरूक करना। स्कूलों में जाकर व्याख्यान देना। वहां अपने साथ वृक्ष का एक पौधा ले जाना नहीं भूलते। लौटते वख्त उसे स्कूल परिसर में लगा कर ही मानते हैं। अब तो गांवों के घर-दीवारों पर उनके संदेश लिखे मिलते हैं। झमनलाल के सामने कोई व्यक्ति पेड़ की टहनी तोड़े या किसी जंगली जानवर को कष्ट पहुंचाने का प्रयास कर, यह उन्हें बर्दास्त नहीं।ड्ढr करमा जसे त्योहार पर भी करम पेड़ की टहनी तोड़े जाने का विरोध वह अपने अंदाज से करते हैं, उस दिन रोते हैं, झमनलाल! एक बार गोला थाने की बैठक में वह एक बड़े नेताजी से केवल इसलिए उलझ गये कि उन्होंने जंगली हाथियों द्वारा की जा रही बर्बादी और उन्हें खदेड़ने की बात कही थी।ड्ढr झमनलाल कहते हैं- ‘मनुष्य जंगल उााड़ रहे हैं, तो बेचार वन्य जीव कहां जायें। घर उारने का दर्द और प्रतिकार केवल आपमें है?’ झमनलाल के प्रशंसकों में मंत्री, अधिकारी, शिक्षक, प्राचार्य, समाजसेवी सभी हैं। बाजाप्ता एक रािस्टर में उनके हस्ताक्षर हैं। चक्षु चिकित्सा केंद्र पेटरवार के सम्माननीय जगजीवन महाराज ने भी झमनलाल के प्रयासों को अतुलनीय कहा है। ट्रस्ट ने झमनलाल के संत-वाणी संकलन की किताब छपवायी है।

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