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जंग और धारदार होगी

सीमापार से आतंकवादी घुसपैठ, देशद्रोह व उग्रवाद फैलाकर भारत की एकता व अखंडता पर चोट करने की साजिश में लिप्त तत्वों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने आतंकवाद निरोधक कड़े कानून का विधेयक संसद में पेश कर दिया है। इस विधेयक का मकसद आंतकवादी वारदातों में शामिल अपराधियों के खिलाफ त्वरित जांच, मुृकदमा चलाने और उन्हें बिना देर किए सजा दिलाने के पुख्ता प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं।ड्ढr मंगलवार को लोकसभा में पेश विधेयक में खुलासा किया गया है कि आतंकवादी वारदातों में आरोपित व्यक्ित को विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ 30 दिन के भीतर हाईकोर्ट जाना होगा। हाईकोर्ट को इस तरह के मामलों में अधिकतम 0 दिन के भीतर अपील का संज्ञान लेने का वक्त दिया जाएगा।ड्ढr यह विधेयक भारत व विदेशों में रह रहे देश के नागरिकों पर समान रूप से लागू होगा। प्रस्तावित जांच एजेंसी का नाम राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) होगा। गृहमंत्री पी. चिदंबरम द्वारा सदन में पेश विधेयक के मसौदे में कहा गया है कि देश में बाहरी मुल्कों से प्रायोजित आंतकवाद के अलावा उग्रवाद, विद्रोह, जिसमें नक्सलवादी घटनाएं भी शामिल हैं, इस विधेयक की परिधि में आएंगे।ड्ढr पाकिस्तान व बांग्लादेश का नाम लिए बिना विधेयक में कहा गया है कि सीमा पार से होने वाली घुसपैठ व आंतकवाद के अलावा नशीले पदार्थो की तस्करी और भारत में नकली मुद्रा का प्रचलन जसी अवांछित गतिविधियों की जांच भी नई एजेंसी के दायर में आएंगी।ड्ढr आतंकवाद फै लाने के दायर में उन लोगों को भी शामिल करने का प्रस्ताव है, जो आंतक के बदले में धन या संपत्ति हासिल करने के दोषी पाए जांएगे। आतंकी तत्वों को सजा दिलाने के लिए विधेयक में विशेष न्यायालय की स्थापना का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी जांच के लिए मामले सुपुर्द करने की प्रकिया का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सबसे पहले थानेदार इस तरह के मामलों को राज्य सरकार को अग्रसारित करेगा। उसके बाद राज्य सरकार मामले को केंद्र के सुपुर्द करगी। मामले के सभी रिकार्ड व साक्ष्य एजेंसी को सौंपे जांएगे। एजेंसी के सुपुर्द मामला होने के बाद संबंधित थाने की पुलिस कोई समानांतर जांच नहीं करगी।ड्ढr सख्त कानून के बिना फायदा नहीं : भाजपा महासचिव अरुण जेटली ने कहा कि अगर आतंकवाद से लड़ने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी गठित की जाती है, तो वह उसका स्वागत करेगी बशर्ते उससे अधिक प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कड़ा कानून भी साथ-साथ बनाया जाए। सब इंस्पेक्टर स्तर के एनआईए अधिकारियों के पास एसएचओ के बराबर अधिकार होंगे.ड्ढr विशेष अदालतों में रो सुनवाई होगी.ड्ढr अनलॉफुल एक्िटविटीा (प्रिवेंशन) एक्ट में संशोधन के जरिए आतंक के मामलों में पुलिस हिरासत की अवधि 15 से बढ़कर 30 हो जाएगी. चार्जशीट दाखिल करने से पहले न्यायिक हिरासत की अवधि छह माह होगीड्ढr आतंकी गतिविधियों के लिए पैसा एकत्र करने वाले, प्रशिक्षिण शिविर चलाने वाले और ऐसी गतिविधियों के लिए लोगों को भर्ती करने वाले ताउम्र सलाखों के पीछे भेजे जा सकते हैं.ड्ढr आरोपित पर होगी खुद को निर्दोष साबित करने की जिम्मेदारी xद्यह्लxद्यह्लस्नह्रहृञ्ज्xद्दह्लxद्यह्लxद्यह्लस्नह्रहृञ्ज् थ्ड्डष्द्ग=॥ञ्ज्ष्टद्धड्डठ्ठड्डद्म4ड्डxद्दह्लं

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