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दिल्ली कैबिनेट में किरण वालिया नया चेहरा

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की बुधवार को गठित मंत्रिपरिषद में किरण वालिया को छोड़कर सभी पुराने चेहरे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या विकास की डोर थामने का दावा करने वाले ये सारे चेहरे जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतर पाएगी! डा अशोक कुमार वालिया मंत्रिपरिषद के सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं और लगातार चौथी बार विधानसभा चुनाव जीतकर आए है। पेशे से चिकित्सक डा वालिया ने इस बार परिसीमन के बाद नई बनी विधानसभा सीट लक्ष्मी नगर से भारतीय जनता पार्टी के मुरारी सिंह पंवार को हराया। तीसरी बार मंत्रिमंडल में शामिल डा वालिया की छवि ईमानदार और कुशल प्रशासक की है। साठ वर्षीय डा वालिया ने वित्त, लोक निर्माण और ऊर्जा विभाग में अपने काम की छाप छोड़ी है। इससे पहले वह स्वास्थ्य और पर्यावरण मंत्री के रूप में भी काम कर चुके हैं। पचास वर्षीय हारुन यूसुफ पिछली सरकार में परिवहन, ऊर्जा एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री थे। परिसीमन के बाद नई बनी विधानसभा सीट बल्लीमरान से भाजपा के मोती लाल सोढ़ी को हराकर लगातार चौथी बार विधानसभा पहुंचे यूसुफ 1से 1े दौरान छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। मंगतराम सिंघल की उम्र इकसठ वर्ष है और वे शालीमार बाग से विजयी हुए हैं। उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे। स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त सिंघल ने छात्र जीवन से ही कांग्रेस की राजनीति शुरु कर दी। वर्ष में वजीराबाद से निगम पार्षद बने सिंघल 10 में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के झुग्गी झोंपडी प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष बने। पिछली सरकार में उद्योग मंत्री के रूप में सिंघल ने बाल मजूदरों की समस्या से निपटने के साथ ही असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के कल्याण की दिशा में कई कदम उठाए। पिछली सरकार में शिक्षा मंत्री के रूप में बेहतरीन कार्य करने वाले लवली ने इस बार गांधी नगर सीट से भाजपा के कमल जैन को सर्वाधिक मतों से हराने का रिकार्ड बनाया। लवली की कार्य कुशलता और प्रयासों की बदौलत दिल्ली के सरकारी स्कूलों के बोर्ड की परीक्षा के परिणामों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। छात्र जीवन से ही राजनीति में उतरे 40 वर्षीय लवली 10 में दिल्ली प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष बने और इसके बाद वह लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए। वर्ष 1में पहली बार दिल्ली विधानसभा के लिए चुने गए। वर्ष 2003 में दुबारा विधायक बने और मंत्रिमंडल में शामिल हुए। पिछली सरकार में पर्यटन मंत्री का प्रभार भी उनके पास था और इस दौरान उन्होंने आेलंपिक टार्च रिले, वर्ल्ड हाफ मैराथन और क्वीन बैटन रिले जैसे समारोहों का शानदार आयोजन कर अपनी कुशलता दिखाई। शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने बड़े पब्लिक स्कूलों में गरीब तबकों के बच्चों के लिए 20 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का कार्य, सरकारी विद्यालयों में लड़कियों के लिए मुफ्त शिक्षा जैसे कदम उठाए। इक्यावन वर्षीय राजकुमार चौहान ने 1में राजनीति में प्रवेश किया और इसके बाद एक-एक करके सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए। वर्ष 1में नजफगढ़ जिले से कांग्रेस के महासचिव बनने के बाद 1में वह यहां के अध्यक्ष बने। वर्ष 1में कांग्रेस पार्टी के खिलाफ हवा के बावजूद वह विधायक बने और अबकी बार लगातार चौथी बार विधानसभा पहुंचे हैं। वर्ष 1में दिल्ली सरकार में शामिल हुए चौहान ने पिछली मंत्रिपरिषद में आखिरी डेढ़ साल तक लोक निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी कुशलता से निभा चुके हैं। चौंसठ वर्षीय किरण वालिया को दिल्ली की नई मंत्रिपरिषद में योगानंद शास्त्री के स्थान पर लिया गया है। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की काफी करीबी माने जाने वाली वालिया दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में अपनी कुशलता दिखा चुकी है। दिल्ली के लेडी श्रीराम कालेज से राजनीतिशास्त्र में स्नातक और दिल्ली विश्व विद्यालय से स्नातकोत्तर सुश्री वालिया ने राजधानी के लक्ष्मीबाई कालेज में अध्यापन का कार्य किया। छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय वालिया ने इस बार मालवीय नगर सीट से भाजपा के रामभज को परास्त किया। तीसरी बार विधानसभा पहुंची वालिया अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के शिक्षक सेल की संयोजक भी रह चुकी हैं।

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