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कॉलेजों में सीटें कम, होगी एडमिशन की मारामारी

शिक्षा व्यवस्था में सुधार का सरकारी दावा खोखला साबित होता नजर आ रहा है। सरकारी उदासीनता के कारण इस बार भी लगभग एक लाख छात्रों का कॉलेजों में एडमिशन नहीं हो पायेगा। इसका मुख्य कारण डबल शिफ्ट में पढ़ाई की योजना का धरातल पर नहीं उतरना। डबल शिफ्ट में पढ़ाई शुरू करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ हर सब्जेक्ट में कम से कम दो टीचर, लैब टेक्नीशियन, लैब ब्वॉय, तीन थर्ड और तीन फोर्थ ग्रेड कर्मियों की आवश्यकता होगी। इस पर कम से कम 25 से 30 लाख रुपये सालाना का खर्च आयेगा। तत्कालीन शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की ने अगस्त 2007 में राज्य के 60 सरकारी कॉलेजों में डबल शिफ्ट में पढ़ाई की अधिसूचना जारी करने की घोषणा की थी, लेकिन यह घोषणा धरी की धरी रह गयी। कॉलेजों में सीटों की संख्या में भी वृद्धि नहीं की गयी। ऐसे में विद्यार्थियों का हायर एजुकेशन पाना मुश्किल हो सकता है।ड्ढr वर्ष 2007 में 80 हाार छात्रों का कॉलेजों में एडमिशन नहीं हो पाया था। वर्ष 2008 में 2,0 छात्रों ने मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। जबकि राज्य के सभी कॉलेजों को मिलाकर सीटों की संख्या लगभग दो लाख है। वर्ष 2008 में नामांकन में 70 फीसदी माक्र्स भी कम पड़े गये थे। इस वर्ष भी लगभग 80 हाार छात्रों का नामांकन नहीं हो पाया था। खास यह भी है कि राज्य में सिर्फ एक फीसदी विद्यार्थियों को ही हायर एजुकेशन मिल पाता है। यह दूसर राज्यों की तुलना में सबसे कम है। क्वालिटी ऑफ एजुकेशन के लिए यूजीसी ने निर्देश दिया था कि 40 छात्रों पर एक टीचर का होना अनिवार्य है। लेकिन राज्य के कॉलेजों में 200 छात्र पर भी एक शिक्षक नहीं हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।ड्ढr कई कॉलेजों में बढ़ायी गयी है सीटों की संख्या : यादवड्ढr इंटमीडिएट एकेडेमिक काउंसिल के अध्यक्ष शालीग्राम यादव ने कहा कि कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ायी गयी है। हर विद्यार्थी चाहता है कि अच्छे कॉलेज में नामांकन हो। इसलिए भी दिक्कत हो रही है। यह देखना कॉलेज का भी काम है।

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