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23 फरवरी, 2020|3:32|IST

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वरीयता सूची को लेकर शिक्षकों में आक्रोश

पटना विवि में वरीयता सूची बनाए जाने को लेकर शिक्षकों में जबर्दस्त आक्रोश है। शिक्षकों का कहना है कि विवि प्रशासन ने नियम कानून को ताक पर रखकर सूची का निर्माण शुरू कर दिया है। वरीयता के मामले को लेकर पहले से ही विश्वविद्यालय के दो शिक्षक न्यायालय की शरण में हैं। इसके बावजूद आनन-फानन में सूची का निर्माण शुरू कर दिया गया है। इसको लेकर पूटा ने कुलपति से गुहार लगाई है। कुलपति डा. श्याम लाल ने शिक्षकों के आक्रोश को देखते हुए वरीयता सूची के निर्माण में पूरी पारदर्शिता बरतने का आश्वासन दिया है। पटना विवि में शिक्षकों की वरीयता सूची का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। इसमें सभी शिक्षकों का क्रम निर्धारित किया जा रहा है।ड्ढr ड्ढr इस क्रम के आधार पर ही उन्हें लाभ प्रदान किया जाएगा। हालांकि शिक्षकों की वरीयता को लेकर मामला कोर्ट में भी चल रहा है। पटना विवि के इतिहास विभाग के वरिष्ठ शिक्षक व पूर्व कुलपति डा. निहार नंदन प्रसाद सिंह व डा. अजय कुमार ने कोर्ट में वरीयता को ज्वाइनिंग तिथि से निर्धारित किए जाने को लेकर कोर्ट की शरण में हैं। पूटा ने इस मामले को कुलपति के समक्ष उठाया है। पूटा अध्यक्ष डा. यूके सिन्हा, महासचिव डा. रणधीर कुमार सिंह व सिंडिकेट सदस्य डा. प्रशांत दत्ता ने कुलपति को इस सूची की खामियों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि 11 से 13 दिसंबर के बीच इस सूची के आधार पर मांगे गए आपत्तियों पर भी विचार नहीं किया गया है। इस दौरान 40 आपत्तियां आई थी। साथ ही काफी शिक्षकों को इस संबंध में कुछ नहीं पता था और अब उनको इस सूची पर आपत्ति है। कुलपति ने पूटा द्वारा उठाए गए सवालों पर गौर करते हुए आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की उचित वरीयता सूची निर्माण के लिए वह स्वयं इसका निरीक्षण करंगे।

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