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ऊंचे कट-ऑफ का कारण कम सीटें: सिब्बल

ऊंचे कट-ऑफ का कारण कम सीटें: सिब्बल

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल का मानना है कि इस साल दिल्ली विश्वविद्यालय के कुछ विषयों में प्रवेश के लिए विवादास्पद 100 फीसदी कट-ऑफ मांग और आपूर्ति में अंतर के कारण रहा और इसका समाधान शिक्षा संबंधी बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने से ही हो सकता है।

सिब्बल ने कहा कि अगर मांग, आपूर्ति से बहुत ज्यादा होगी, तो कट-ऑफ स्वाभाविक तौर पर उंचा रहेगा। यह एक संस्थानगत मुद्दा है। उन्होंने सवाल किया, अगर श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एक है और हर कोई उसी में प्रवेश चाह रहा है, तो मेरे पास क्या समाधान हो सकता है।

इसके पहले उंचे कट-ऑफ को अतार्किक बताने वाले सिब्बल ने कहा कि इस समस्या का समाधान पूरे देश में शिक्षा संबंधी बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने में निहित है। उन्होंने कहा कि सरकार अकेले सभी शैक्षणिक संस्थाएं, विश्वविद्यालय और कॉलेज नहीं खोल सकती। इसलिए आने वाले सालों में निजी क्षेत्रों को इसमें अहम भूमिका निभानी होगी। हम शिक्षा के क्षेत्र में निजी क्षेत्र को बढ़ावा देना चाहते हैं।

इस साल दिल्ली विश्वविद्यालय के नामी कॉलेज श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में रहे 100 फीसदी कट-ऑफ ने बड़े विवाद को जन्म दे दिया था। ज्यादातर छात्र और अभिभावक इसके खिलाफ खड़े हो गए थे।

सिब्बल ने इस बात पर भी जोर दिया कि गैर वाणिज्य के छात्रों के लिए भी कट-ऑफ 100 फीसदी रखा जाना अनुशासन पर आधारित मौजूदा शिक्षा तंत्र का प्रतिबिंब है। साथ ही उन्होंने शिक्षा तंत्र में सुधार लाने पर भी जोर दिया।

मंत्री ने कहा कि हमें वाणिज्य, कला और विज्ञान संकाय की अवधारणा को बदलना होगा क्योंकि इसका मतलब होता है कि विज्ञान का कोई छात्र केवल विज्ञान ही पढ़ सकता है, इतिहास नहीं। उन्होंने कहा, जब दिमाग की कोई सीमा नहीं होती, तो ज्ञान की सीमा क्यों होनी चाहिए। एक बार हम इन सीमाओं से पार पा जाएंगे और शिक्षा तंत्र को बढ़ावा देंगे, तब इनमें से कई परेशानियां खत्म हो जाएंगी।

कई खबरों में कहा गया था कि ओबीसी कोटे की बहुत सी सीटें खाली छूट रही हैं और बाद में उन्हें सामान्य श्रेणी के छात्रों से भरा जा रहा है। इस बारे में सरकार क्या कदम उठा रही है, इसके जवाब में सिब्बल ने कहा, हमने इस बारे में निर्देश दिए हैं कि इनमें से कोई भी सीट सामान्य श्रेणी में नहीं जाए।

उन्होंने कहा कि मंत्रालय सुनिश्चित करेगा कि 27 फीसदी ओबीसी कोटा पूरा भरे। सिब्बल के मुताबिक, हमने यह भी कहा है कि अगर अंक 10 फीसदी (छूट सीमा) से कम हैं, तो आप 10 फीसदी से नीचे भी जा सकते हैं। इस मुद्दे का और विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ओबीसी श्रेणी के लिए प्रतिशत में छूट की सीमा कठोरता से निर्धारित नहीं करता।

उन्होंने कहा कि अगर आपको 100 फीसदी अंक मिले हैं और ओबीसी श्रेणी के लिए यह 90 फीसदी होता है, तो 89 फीसदी अंक वाले को इसमें प्रवेश नहीं मिलता। यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बहुत अनुचित व्याख्या होगी क्योंकि न्यायालय ने ऐसे परिदृश्य की कल्पना नहीं की थी।

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