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आतंक पर यूं हवा हुई दलों की एकता

राज्यसभा में बृहस्पतिवार को आतंकवाद से निपटने संबंधी दो महत्वपूर्ण विधेयकों नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी और अनलॉफुल एक्िटीविटीज प्रिवेंन्सन पर चर्चा के दौरान राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोपों का ऐसा दौर चला कि आतंकवाद पर हाल के दिनों में दिखी एकजुटता हवा होती नजर आई। मौजूदा बिलों पर छिड़ी चर्चा देश के विभाजन तक पीछे जा पहुंची तो चेयर को हस्तक्षेप कर सांसदों को याद दिलाना पड़ा कि विषय क्या है और सदन का समय कितना कीमती है। चर्चा की शुरूआत में भाजपा के अरुण जेटली ने अनलॉफुल एक्िटीविटीज विधेयक में पोटा के प्रावधानों को बिना कोमा, फुलस्टाप के उठाने की बात कहते हुए इसे यूपीए की बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) चोरी करार दिया। कांग्रेस की बारी आई तो केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल यह कहने से नहीं चूके कि यदि एनडीए सरकार ने अजहर मसूद को रिहा नहीं किया होता तो न जैश-ए-मोहम्मद बनता और न संसद पर हमला होता। सपा के अमर सिंह ने मायावती का नाम लिए बगैर कहा कि उन्होंने एक सपा नेता के घर पहले हथियार रखवाए फिर उन्हें बरामद कर पोटा लगा दिया। तब बसपा के सदस्य बिफर पड़े लेकिन पोटा के राजनीतिक दुरुपयोग पर सिंह चुप नहीं हुए। उन्होंने कहा कि जब पोटा बना तो एमडीएमके नेता वाइको ने पोटा के पक्ष में वोट दिया था। लेकिन बाद में तमिलनाडु की सरकार ने पोटा में ही उन्हें बंद कर दिया। लेकिन जिस दल की सरकार ने उन पर पोटा लगाया आज वाइको उसी के साथ है। अन्नाद्रमुक के मैत्रयेन ने इस पर आपत्ति दर्ज करानी चाही लेकिन चेयर ने अनुमति नहीं दी। सिंह ने कहा कि एटीएस के चीफ हेमंत करकर को जिस दल का मुख्यमंत्री दो रोज पहले देशद्रोही बता रहा था, शहीद होने के बाद उन्हें एक करोड़ रुपये का ऐलान करता है।

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  • Web Title: आतंक पर यूं हवा हुई दलों की एकता