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रवैया नहीं सुधरा तो मंत्री पद छोड़ दूंगा : भोला

ेन्द्रीय एजेंसी एनबीसीसी के रवैये से आहत नगर विकास मंत्री भोला प्रसाद सिंह ने साफ संकेत दिये कि अगर का कंपनी का रवैया नहीं सुधरा तो वह मंत्री पद छोड़ देंगे। इस बीच कंकड़बाग ड्रनेज योजना में तेजी लाने के लिए सरकार अब एनबीसीसी से नाता तोड॥कर नये विकल्पों पर भी विचार कर रही है। इसके बावजूद कंपनी को ‘गो अहेड’ आदेश जारी होगा। हाल ही में एनबीसीसी के सीएमडी द्वारा राज्य सरकार पर निशाना साधने से आहत भोला बाबू ने गुरुवार को कंपनी पर जवाबी हमला बोला। अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि एनबीसीसी के सीएमडी ने अपने अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग किया है। लिहाजा सीएमडी को बकायदा प्रस कान्फ्रंस बुलाकर अपने बयान के लिए ‘खेद’ प्रकट करने को कहा गया है।ड्ढr ड्ढr श्री सिंह ने कहा कि एनबीसीसी के कारण ही पिछले वर्षो में जनता ने कष्ट भोगा, समय-समय पर सरकार भी जलील होती रही। हमार लिए कयामत का समय है। कंपनी को अपना रवैया सुधारने की हिदायत दी गयी है। बकौल भोला बाबू ‘इसके बाद भी काम नहीं दिखा तो हम यह मान लेंगे कि हमारी उपयोगिता खत्म हो गयी है।’ उन्होंने कहा कि कंकड़बाग में काम करने वाले पेटी कॉन्ट्रैक्टर तो एनबीसीसी की बात तक नहीं मानते। अगर कंपनी ने अपने पेटी कॉन्ट्रैक्टरों को हटाकर योग्य ठेकेदार-इंजीनियर तैनात नहीं किये तो हम दूसर विकल्पों पर भी विचार करंगे। श्री सिंह ने कहा कि सरकार के पास पैसा है या नहीं, इस बात से किसी कंपनी के अधिकारी को कोई लेना-देना नहीं है। हम एनबीसीसी को ‘गो अहेड’ पत्र देने जा रहे हैं। वैसे एनबीसीसी कैसे काम करती हैं, यह भी छुपा नहीं। हमने 12 करोड़ रुपये दिये लेकिन कंपनी ने अबतक उपयोगिता प्रमाण पत्र भी नहीं दिया है। यही नहीं भागलपुर के लिए बिहार राज्य जल पर्षद और एनबीसीसी के डीपीआर की दर में भी जमीन-आसमान का अंतर है। बीआरजेपी ने 7रोड़ जबकि एनबीसीसी ने 305 करोड़ रुपये का डीपीआर बनाया। हमने जवाब-तलब किया है।ं

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