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बर्खास्तगी के फैसले में तीन अहम घंटे

सीएम हाउस में 16 दिसंबर को हुई यूपीए की बैठक में ही दो मंत्रियों की बर्खास्तगी का फैसला हो गया था। इसे 18 दिसंबर को राजभवन भेजने में तीन घंटे लगे। इन तीन घंटों में यूपीए की बैठक में जितने उतार-चढ़ाव आये, वह किसी फिल्म के क्लाइमेक्स से कमड्ढr नहीं रहा। गुरुवार को ही मंत्रियों को बर्खास्त किये जाने पर अड़े प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप कुमार बलमुचू बीच बैठक में उठ कर चले गये। उन्हें फिर बुलाया गया। फिर गुरुवार को जब मामला टालने की कोशिश होने लगी, तो वह फिर बैठक से निकल कर चल दिये। बलुमचू के दबाव पर अंतत: सीएम को बर्खास्तगी का फैसला करना ही पड़ा।ड्ढr गुरुवार को सत्र समाप्त होने के बाद शाम पांच बजे शुरू हुई बैठक में पूर्व सीएम मधु कोड़ा, प्रदीप बलमुचू, गिरिनाथ सिंह, दुलाल भुइयां, स्टीफन मरांडी, कमलेश कुमार सिंह, नियेल तिर्की, सौरभ नारायण सिंह और यूपीए के कई अन्य विधायक शामिल थे। कांग्रेस और राजद के इन विधायकों ने सीएम से दो टूक कहा कि अनुपूरक बजट पारित हो गया है, दोनों मंत्रियों को बर्खास्त करं। बीच में उत्पाद विभाग के एक विधेयक के शुक्रवार को सदन में पेश किये जाने का सवाल उठा। कहा गया कि दो मंत्रियों को बर्खास्त किये जाने पर कहीं उस धन विधेयक के पारित होने में कोई परशानी तो नहीं होगी। इस सवाल पर लगभग एक घंटा तक चर्चा होती रही। बैठक से ही सीएम यूपीए के सभी विधायकों को शुक्रवार को सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिलवाने लगे। इससे कुछ समय के लिए लगा कि गुरुवार को बर्खास्तगी का मामला टल जायेगा। सूत्रों के अनुसार फिर मंत्रिमंडल में दो मंत्रियों के पद रिक्त होने पर भी सवाल उठा। प्रश्न खड़ा किया गया कि दो पद रिक्त होने से फिर कोई तकनीकी परशानी तो नहीं खड़ी होगी। इस पर भी कुछ देर तक चर्चा हुई और विधि विशेषज्ञों से बात करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचा गया कि मंत्रियों की बर्खास्तगी पर राजभवन की मुहर लगने तक कहीं कोई परशानी नहीं है। कुछ दिनों तक पद रिक्त रहने में भी कोई वैधानिक अड़चन नहीं है। तब जाकर गुरुवार को ही दोनों मंत्रियों को बर्खास्त करने के फैसले को राजभवन प्रेषित किया गया।दिलचस्प मोड़ पर झारखंड की सियासतजनता मेर साथ, दो जनवरी को पता चल जायेगा: एनोसरांची। बर्खास्त ग्रामीण विकास मंत्री एनोस एक्का ने कहा है कि सीएम ने उन्हें मंत्रिमंडल से निकालकर कायरतापूर्ण कार्रवाई की है। उन्हें मंत्री पद से हटाया गया है, लेकिन जनता उनके साथ है। यह दो तारीख को पता चल जायेगा। आय से अधिक सम्पत्ति का मामला तो बहाना है। यह आरोप तो कई और मंत्रियों पर है। उन्हें भी मंत्री पद से हटाना चाहिये था। सीएम तमाड़ चुनाव में पराजय के डर से घबरा गये हैं। उन्होंने चुनाव से पहले ही हार कबूल कर ली है। उन पर जो कार्रवाई की गई है, तमाड़ की जनता इसका मुंहतोड़ जवाब देगी। एक्का ने कहा कि सीएम की इस कार्रवाई से यूपीए का असली चरित्र उाागर हो गया है। कुर्सी तो पेड़ की छाया की तरह है। अब खुलकर अपने प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करूंगा। मंत्री पद से हटाने की चुनौती तो हम पहले से ही दे रहे थे। चुनाव लड़ना और लड़ाना हमारा संवैधानिक अधिकार है। सीएम चाहते थे कि गोलकीपर हट जाये ताकि बिना किसी बाधा के गोल मार सके। गोलकीपर हटाकर गोल मारने की छूट तो किसी को नहीं दी जा सकती। असली खेल तो अब शुरू हुआ है। तमाड़ चुनाव के बाद सब को पता चल जायेगा।ड्ढr यूपीए को इसका खामियाजा भुगतना होगा: रायरांची। बर्खास्त नगर विकास मंत्री हरिनारायण राय ने कहा कि सीएम ने गलत किया है। आय से अधिक सम्पत्ति का मामला कई और मंत्रियों पर भी चल रहा है। सीएम को उन पर भी कार्रवाई करनी चाहिए थी। तमाड़ चुनाव में झापा उम्मीदवार के उतरने से सीएम बौखला गये है। यह कार्रवाई इसी से प्रेरित है। अपने लाभ के लिए किसी की बलि चढ़ाना ठीक नहीं है। सीएम ने ऐसा ही किया है। इससे उनकी कमजोरी उाागर हुई है। उनका यह फैसला एकपक्षीय है।ड्ढr राय ने कहा कि शिबू सोरन को तो मैं अपना अभिवावक समझता था। उनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। इस घटनाक्रम के पीछे मास्टर माइंड काम कर रहा है, जो राज्य का रसातल में ले जाना चाहता है। इसका खुलासा जल्द ही हो जायेगा। यूपीए के लोग दूसर के कंधे पर बंदूक रखकर चलाना अच्छी तरह जानते हैं। मंत्री पद से मुक्त होने से रहत मिली है। रो-रो के किच-किच से मुक्ित मिल गयी है। यूपीए को समर्थन जारी रखने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका फैसला निर्दलीयों के साथ मिलकर करंगे। यूपीए को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

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